नई दिल्ली/रांची: नई दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय में सोमवार को एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई. केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड के मुख्य सचिव, गृह सचिव और डीजीपी समेत कई अधिकारियों के साथ नए कानूनों के क्रियान्वयन और साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह इन नई कानूनी व्यवस्थाओं को जमीन पर उतारने के लिए झारखंड को हर संभव तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करेगी.

कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रणाली को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाना है
बैठक का मुख्य केंद्र देश के तीन नए कानून भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम रहे. केंद्रीय गृह सचिव ने झारखंड के अधिकारियों को इन कानूनों के सफल कार्यान्वयन के लिए विशेष दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इन कानूनों का उद्देश्य न्याय प्रणाली को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाना है, जिसमें केंद्र और राज्य का समन्वय अनिवार्य है.
डिजिटल साक्ष्य और पुलिस की तकनीकी दक्षता
भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत अब डिजिटल साक्ष्य जैसे ईमेल, सर्वर लॉग, स्मार्टफोन और लैपटॉप के डेटा को महत्वपूर्ण माना गया है. बैठक में झारखंड पुलिस की ओर से एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें बताया गया कि: राज्य के अनुसंधानकर्ताओं को तकनीकी रूप से और अधिक दक्ष बनाने की जरूरत है. गवाहों के बयानों को कलमबद्ध करने के साथ-साथ अब उन्हें रिकॉर्डेड फॉर्म (वीडियो/ऑडियो) में कोर्ट में पेश किया जाएगा. हालांकि, अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह व्यवस्था अभी पूरी तरह से धरातल पर नहीं उतरी है और इसमें सुधार जारी है. जांच अधिकारियों को उच्च गुणवत्ता वाले स्मार्टफोन उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि वे मौके पर ही डिजिटल साक्ष्य एकत्र कर सकें.
डिजिटल अरेस्ट और राज्यों का समन्वय
साइबर ठगी और विशेष रूप से डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए रणनीति तैयार की गई. बैठक में साइबर अपराध की रोकथाम के लिए नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के जरिए संदिग्ध म्यूल खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन पर पैनी नजर रखी जा रही है. साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए झारखंड अन्य राज्यों के साथ डेटा विश्लेषण और तकनीकी साक्ष्य साझा कर रहा है. गृह सचिव ने निर्देश दिया कि साइबर अपराध के मामलों में देरी न की जाए और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की जल्द गिरफ्तारी सुनिश्चित हो.
केंद्र सरकार ने झारखंड को आश्वस्त किया है कि संसाधनों और प्रशिक्षण की कमी को दूर करने के लिए केंद्र पूरी तरह राज्य सरकार के साथ खड़ा है. आने वाले दिनों में झारखंड पुलिस की कार्यप्रणाली में एक बड़ा डिजिटल बदलाव देखने को मिल सकता है.

