Chatra: चतरा जिले से पुलिसिया कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है. राजपुर थाना क्षेत्र के बिंधानी गांव में शनिवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब निजी कार में सवार होकर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने एक युवक को जबरन ले जाने का प्रयास किया. ग्रामीणों के संगठित विरोध और तीखे सवालों के आगे पुलिस टीम को पीछे हटना पड़ा और वे मौके से निकल गए.
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सादे लिबास और निजी वाहन ने बढ़ाया संदेह
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शनिवार को एक नीले रंग की बलेनो कार बिंधानी गांव में दाखिल हुई. कार में सवार लोग वर्दी के बजाय सादे कपड़ों (सिविल ड्रेस) में थे. गांव के संदीप दांगी नामक युवक को टीम ने जबरन पकड़कर गाड़ी में बैठाने की कोशिश की. जब परिजनों और ग्रामीणों ने इसका विरोध किया और उनकी पहचान पूछी, तो उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताया. आरोप है कि इस टीम का नेतृत्व गिद्धौर थाना प्रभारी शिवा यादव कर रहे थे. उनके साथ कुछ अन्य लोग भी थे जो पुलिस विभाग के नहीं लग रहे थे. बिना किसी सरकारी वाहन और बिना स्थानीय थाने (राजपुर थाना) को सूचना दिए की गई इस कार्रवाई से ग्रामीण आक्रोशित हो उठे.
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मारपीट और ड्रग्स के आरोप
परिजनों का आरोप है कि पुलिस टीम ने संदीप के साथ बदसलूकी और मारपीट भी की, जिससे वह घायल हो गया. जब लोगों ने कार्रवाई का आधार पूछा, तो टीम की ओर से युवक पर ड्रग्स के कारोबार में संलिप्त होने का मौखिक आरोप लगाया गया. हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि यदि युवक अपराधी था, तो पुलिस को आधिकारिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था, न कि गुपचुप तरीके से निजी वाहन में आकर अपहरण जैसी स्थिति पैदा करनी चाहिए थी. घटना के दौरान जैसे-जैसे भीड़ बढ़ी, ग्रामीणों ने अपने मोबाइल फोन से पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी. खुद को घिरता देख और ग्रामीणों के आक्रोश को भांपते हुए थाना प्रभारी शिवा यादव अपने साथियों के साथ जल्दबाजी में कार लेकर वहां से रवाना हो गए.
