धनबाद: राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन (राकोमयू) ने केंद्र सरकार की मौजूदा नीतियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं. यूनियन के महामंत्री ए.के. झा, कार्यकारी अध्यक्ष बृजेंद्र प्रसाद सिंह एवं वरीय अधिवक्ता अनुपमा सिंह ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, कि एमडीओ (MDO) नीति, कैप्टिव माइंस और कमर्शियल माइनिंग के जरिए कोल इंडिया (CIL) और बीसीसीएल (BCCL) को योजनाबद्ध तरीके से आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है.
इंदिरा गांधी के सपनों को तोड़ा जा रहा है
यूनियन नेताओं ने कहा कि जिस सार्वजनिक उपक्रम की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मजदूरों और राष्ट्रहित में की थी, आज उसे पूंजीपतियों के हाथों का खिलौना बनाया जा रहा है. उन्होंने आंकड़े पेश करते हुए कहा:
राजस्व: कोल इंडिया अब तक सरकार को 77 हजार करोड़ रुपये का राजस्व दे चुकी है.
पूंजीवाद का बोलबाला: नीतियों का लाभ मजदूरों के बजाय आउटसोर्सिंग कंपनियों और निजी घरानों को मिल रहा है.
लेबर कोड: मजदूरों के लिए ‘विषकन्या’ और ‘स्लो पॉइजन’
नये लेबर कोड पर तीखा हमला करते हुए यूनियन ने इसे ‘विषकन्या’ करार दिया. नेताओं ने कहा कि यह कानून पूंजीपतियों के लिए फायदेमंद है, लेकिन मजदूरों के लिए धीमे जहर (Slow Poison) जैसा है. मजदूरों से 8 के बजाय 12 से 15 घंटे काम लिया जा रहा है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त लाभ के. यह पूरी तरह अमानवीय है.
जेबीसीसीआई (JBCCI) पर मंडरा रहा खतरा
प्रेस वक्तव्य में चेतावनी दी गई कि वेतन समझौते के लिए बनी JBCCI व्यवस्था को बंद करने की कोशिश हो रही है. मेडिकल सुविधाओं में कटौती और मेडिकल अनफिट कर्मचारियों के आश्रितों की नौकरियों को लटकाया जाना मजदूरों के साथ वादाखिलाफी है.
यूनियन की प्रमुख मांगें
बिक्री का एकाधिकार: कोयला बेचने का पूरा अधिकार सिर्फ कोल इंडिया और उसकी सहायक कंपनियों (जैसे BCCL) के पास रहे.
निजीकरण पर रोक: कैप्टिव माइंस, कमर्शियल माइनिंग और आउटसोर्सिंग व्यवस्था को तुरंत समाप्त किया जाए.
बहाली की मांग: बीसीसीएल में रिक्त पड़े पदों पर एक लाख शिक्षित युवाओं की तत्काल बहाली हो.
JBCCI का गठन: नए वेतन समझौते के लिए अविलंब जेबीसीसीआई के गठन की घोषणा की जाए.
देशव्यापी विरोध की चेतावनी
यूनियन ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली और गुजरात जैसे राज्यों में मजदूर सड़कों पर उतर चुके हैं. नोएडा और दिल्ली में हजारों श्रमिकों का प्रदर्शन केंद्र सरकार के लिए एक चेतावनी है. यदि कोल इंडिया के अस्तित्व और मजदूरों के हक से खिलवाड़ बंद नहीं हुआ, तो कोयलांचल में भी बड़ा आंदोलन होगा.
