गुमला: अक्सर यह देखा जाता है कि जब कोई व्यक्ति प्रशासनिक पद पर पहुंचता है तो उसके व्यवहार और कार्यशैली में बदलाव आ जाता है. कई बार ऐसा भी माना जाता है कि पद मिलने के बाद अधिकारी आम लोगों से दूरी बना लेते हैं और उनका जुड़ाव सीमित दायरे तक सिमट जाता है. लेकिन कुछ प्रशासनिक पदाधिकारी ऐसे भी होते हैं जो अपने पद की जिम्मेदारियों के साथ-साथ आम लोगों से सीधा संवाद बनाए रखना जरूरी समझते हैं.

गुमला की उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित भी उन्हीं अधिकारियों में शामिल हैं, जिनकी कार्यशैली इन दिनों जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है. जिला का पदभार संभालने के बाद से ही उनका आम लोगों के प्रति व्यवहार और लगाव लोगों के बीच खास तौर पर चर्चा में है.
ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के साथ बिताती हैं समय
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित जब भी ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करती हैं, तो वह केवल औपचारिक निरीक्षण तक सीमित नहीं रहतीं. ग्रामीणों के बीच बैठकर उनसे बातचीत करना, उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करना और स्थानीय हालात की जानकारी लेना उनकी कार्यशैली का अहम हिस्सा बन चुका है.
ग्रामीणों का कहना है कि जब कोई अधिकारी सीधे उनके बीच पहुंचकर उनकी बातें सुनता है, तो लोगों में भरोसा बढ़ता है और समस्याओं के समाधान की उम्मीद भी मजबूत होती है.
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ग्रामीण महिलाओं के साथ सेल्फी बनी चर्चा का विषय
हाल ही में उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित की एक तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है. दरअसल, वे अपने सरकारी कार्यक्रम के दौरान जिले के कामडारा प्रखंड के एक ग्रामीण क्षेत्र का दौरा कर रही थीं. इसी दौरान उन्होंने वहां मौजूद ग्रामीण महिलाओं के साथ एक सेल्फी ली.
इस सेल्फी में जहां ग्रामीण महिलाओं के चेहरे पर खुशी साफ नजर आ रही है, वहीं डीसी प्रेरणा दीक्षित भी काफी सहज और प्रसन्न दिखाई दे रही हैं. यह तस्वीर प्रशासन और आम लोगों के बीच बेहतर संबंधों की झलक पेश करती है.
जमीनी स्तर पर काम करने पर देती हैं जोर
उपायुक्त प्रेरणा दीक्षित का मानना है कि जब तक प्रशासनिक अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर काम नहीं करेंगे, तब तक विकास योजनाओं का लाभ सही मायनों में लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा. इसी कारण वे अधिकारियों को भी लगातार यह निर्देश देती हैं कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याओं को समझें और योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का जायजा लें.
जनता दरबार से बढ़ा लोगों का विश्वास
डीसी का यह भी प्रयास रहता है कि सप्ताह में आयोजित होने वाले जनता दरबार में अधिकतम समय तक वे स्वयं मौजूद रहें, ताकि लोगों की समस्याओं को सीधे सुन सकें. यदि किसी कारणवश वे मुख्यालय में उपस्थित नहीं रहती हैं, तो वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश देकर जाती हैं कि जनता दरबार में आने वाले लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए.
उनकी इसी कार्यशैली का परिणाम है कि जिले में प्रशासन के प्रति लोगों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है और आम लोगों का प्रशासन से जुड़ाव भी मजबूत होता दिखाई दे रहा है.

