गिरिडीह: समाहरणालय सभागार में समर/CMAM कार्यक्रम के अंतर्गत समीक्षात्मक बैठक सह 0 से 6 माह के शिशुओं में कुपोषण के खतरे की पहचान और प्रबंधन को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य जिले में कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य स्तर में सुधार लाना रहा.
कुपोषण की शुरुआती पहचान पर दिया गया जोर
बैठक में विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी, आंगनबाड़ी सेविकाएं और बाल विकास परियोजना से जुड़े कर्मी उपस्थित रहे. इस दौरान कार्यक्रम की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई और शिशुओं में कुपोषण के शुरुआती लक्षणों की पहचान पर विशेष जोर दिया गया.
सिविल सर्जन ने कहा कि शिशु के जीवन के पहले छह महीने उसके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं. इस अवधि में उचित पोषण, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार सुनिश्चित करना जरूरी है.

प्रशिक्षण में दी गई विस्तृत जानकारी
प्रशिक्षण सत्र के दौरान कुपोषण के कारण, पहचान के तरीके, वजन और ऊंचाई की नियमित निगरानी, स्तनपान की महत्ता और माताओं को जागरूक करने के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी गई.
बताया गया कि CMAM के तहत कुपोषित शिशुओं की समय पर पहचान कर उन्हें आवश्यक पोषण, चिकित्सकीय परामर्श और निरंतर निगरानी उपलब्ध कराना जरूरी है. गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों में रेफर करने और नियमित फॉलोअप सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए.

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गांव-गांव तक जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि आंगनबाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से गांव स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाए. माताओं और अभिभावकों को शिशु पोषण, स्तनपान और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने पर विशेष बल दिया गया. साथ ही सभी प्रखंडों में कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, नियमित समीक्षा और समयबद्ध रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए.

टीम भावना से कुपोषण मुक्त जिले का संकल्प
कार्यक्रम के अंत में सभी अधिकारियों और कर्मियों को टीम भावना के साथ कार्य करते हुए जिले को कुपोषण मुक्त बनाने का संकल्प दिलाया गया. अधिकारियों ने कहा कि समन्वित प्रयास, जागरूकता और सतत निगरानी के माध्यम से ही इस समस्या को कम किया जा सकता है.
0 से 6 माह के शिशुओं में कुपोषण रोकथाम के प्रमुख बिंदु
जन्म के समय शिशु का वजन 2500 ग्राम या उससे अधिक होना चाहिए. जन्म से 6 माह तक केवल स्तनपान किया जाना चाहिए. समय पर पूर्ण टीकाकरण और स्वच्छता का विशेष ध्यान जरूरी है. बीमारी के दौरान और बाद में उचित देखभाल भी आवश्यक है.
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कुपोषण के खतरे वाले शिशुओं की पहचान
कम वजन वाले शिशु, समय से पहले जन्मे शिशु, SNCU से इलाज के बाद घर लौटे शिशु, स्तनपान में कठिनाई वाले शिशु और अस्वस्थ या कमजोर माताओं के शिशु विशेष जोखिम में रहते हैं.
समुदाय आधारित प्रबंधन के प्रमुख चरण
कुपोषण के खतरे की पहचान, खतरे का वर्गीकरण, प्रबंधन का स्तर तय करना, शिशु और माताओं का समुचित प्रबंधन तथा रिकवरी, फॉलोअप और डिस्चार्ज की प्रक्रिया को सुनिश्चित करना आवश्यक बताया गया.
इस प्रशिक्षण के माध्यम से जिले में कुपोषण के खिलाफ एक संगठित और प्रभावी अभियान को गति देने का प्रयास किया गया.
