Hazaribagh: विनोबा भावे विश्वविद्यालय (विभावि) में प्रभारी रजिस्ट्रार पद को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. महिला प्रभारी रजिस्ट्रार को बिना किसी गंभीर आरोप के हटाए जाने के बाद विश्वविद्यालय की ओर से भेजे गए नामों में फायनांस ऑफिसर (एफओ) सुरेन्द्र प्रसाद कुशवाहा के नाम पर मुहर लग गई. लोकभवन से अधिसूचना जारी होने के बाद उन्होंने प्रभारी रजिस्ट्रार पद का कार्यभार भी संभाल लिया है.

हालांकि, उनकी नियुक्ति के साथ ही कई सवाल उठने लगे हैं. लंबे समय से विभावि में फायनांस ऑफिसर के पद पर रहे सुरेन्द्र प्रसाद कुशवाहा उस अवधि में पदस्थ थे, जब विश्वविद्यालय में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे. झारखंड सरकार के वित्त विभाग के अंकेक्षण निदेशालय की अंकेक्षण प्रतिवेदन संख्या 34/2023-24 में तत्कालीन कुलपति डॉ. एमएन देव के कार्यकाल के दौरान कई गंभीर गड़बड़ियों का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट में खरीद प्रक्रिया, रंग-रोगन, ड्राइ फ्रूट, वाहन खरीद, आईफोन खरीद, यात्रा खर्च, पेट्रोल-डीजल सहित विभिन्न मदों में वित्तीय अनियमितताओं की बात कही गई है.
अंकेक्षण रिपोर्ट में लाखों रुपये की वसूली की अनुशंसा की गई थी. शुरुआती तौर पर यह राशि 40 लाख रुपये से अधिक बताई गई, हालांकि बाद में इसमें कमी आई. बावजूद इसके, विश्वविद्यालय प्रशासन अब तक संबंधित राशि की वसूली नहीं कर पाया है.
प्रभारी रजिस्ट्रार बनाए जाने पर उठ रहे सवाल
सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में की गई गंभीर टिप्पणियों को लंबे समय से दबाकर रखा गया है. ऐसे में उस अवधि के प्रमुख अधिकारियों में शामिल रहे तत्कालीन एफओ सुरेन्द्र प्रसाद कुशवाहा को प्रभारी रजिस्ट्रार बनाए जाने पर सवाल उठ रहे हैं. विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर भी लगातार आलोचना हो रही है. आरोप है कि वित्तीय अनियमितताओं पर कार्रवाई के बजाय संबंधित अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर जिम्मेदारी दी जा रही है, जिससे विश्वविद्यालय की छवि पर सवाल खड़े हो रहे हैं.
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