हजारीबाग: माधोपुर के विकास पर बनी सहमति, पुनर्वास और रोजगार के दो मुद्दों पर पेंच

Hazaribagh : बरही विधानसभा क्षेत्र के माधोपुर गांव के ग्रामीणों और DVC-NTPC के बीच गांव के विकास और ग्रामीणों की मांगों को...

Hazaribagh : बरही विधानसभा क्षेत्र के माधोपुर गांव के ग्रामीणों और DVC-NTPC के बीच गांव के विकास और ग्रामीणों की मांगों को लेकर हुई वार्ता में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी. कंपनी की ओर से गांव को मॉडल विलेज के रूप में विकसित करने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की बात स्वीकार की गई. हालांकि, ग्रामीणों के दो प्रमुख मुद्दों पर अभी सहमति नहीं बन सकी है.

स्मार्ट बोर्ड से लेकर स्वास्थ्य सुविधा तक पर सहमति

वार्ता में गांव में स्मार्ट बोर्ड, लाइब्रेरी, CSC सेंटर, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 24 घंटे एंबुलेंस सेवा, जियो टावर और गलियों में प्रकाश व्यवस्था उपलब्ध कराने पर सहमति बनी. साथ ही सड़क और गलियों की मरम्मत कराने की बात भी स्वीकार की गई. इसके अलावा कौशल विकास कार्यक्रम संचालित करने, महिला समूहों को बढ़ावा देने और कंपनी में 75 प्रतिशत योग्य स्थानीय लोगों को रोजगार देने के मुद्दे पर भी सकारात्मक सहमति बनी. CSR फंड से इचाकिया नेहरू पार्क के विकास पर भी सहमति जताई गई.

लिखित समझौते के बाद काम शुरू कराने की तैयारी

ग्रामीणों के अनुसार कंपनी की ओर से स्वीकार किए गए सभी बिंदुओं पर उचित तिथि के साथ लिखित समझौता और हस्ताक्षर किए जाएंगे. इसके बाद सहमति के अनुसार विकास कार्यों को सुनिश्चित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी. ग्रामीणों ने कहा कि गांव के विकास से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर कंपनी का सकारात्मक रुख स्वागत योग्य है. इससे लंबे समय से चली आ रही कई समस्याओं के समाधान की उम्मीद जगी है.

1952-53 की पुनर्वास नीति पर अब तक सहमति नहीं

वार्ता के दौरान ग्रामीणों की दो प्रमुख मांगों पर अभी सहमति नहीं बन पाई. इनमें 1952-53 की पुनर्वास नीति को लागू करने और वर्ष 1999 की घटना में प्रभावित/मृत परिवारों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने की मांग शामिल है. ग्रामीणों का कहना है कि इन दोनों मांगों पर सरकार और कंपनी की स्पष्ट सहमति जरूरी है. उनका तर्क है कि पुराने पुनर्वास से जुड़े मामलों और प्रभावित परिवारों के अधिकारों का न्यायपूर्ण समाधान होना चाहिए.

विभाग में आवेदन देकर रखी मांग

दोनों लंबित मुद्दों को लेकर ग्रामीणों ने संबंधित विभाग में आवेदन भी दिया है. ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी से विवाद करना नहीं, बल्कि प्रभावित परिवारों को उनका न्यायसंगत अधिकार दिलाना है. ग्रामीणों ने कहा कि विकास कार्यों को लेकर बनी सहमति का वे स्वागत करते हैं, लेकिन जब तक पुनर्वास नीति और प्रभावित परिवारों से जुड़े मामलों का न्यायपूर्ण समाधान नहीं होता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा. निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों ने सत्याग्रह आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी है. ग्रामीणों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है. वे चाहते हैं कि सभी प्रभावित ग्रामीणों को न्यायसंगत अधिकार और उचित न्याय मिले.

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