Ranchi : पिछले 18 वर्षों से झारखंड के विभिन्न जिलों में स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) अंतर्गत संविदा पर कार्यरत ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफ (ANM) के नियमितीकरण मामले में झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश दीपक रौशन की अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कुमारी गायत्री एवं अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने प्राथियो को अंतरिम राहत भी प्रदान की है.
अंतिम आदेश तक कर्मियों के निष्कासन पर रोक
अदालत ने विभाग को यह निर्देशित किया कि मामले में अंतिम आदेश आने तक कर्मियों को नौकरी से नहीं निकाला जाए, वही उनके वेतनमान को भी नियमित रूप से दिया जाए. मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त मुकर्रर की गई है.

न्यूनतम वेतनमान और अनिश्चितता से गुजरते है ANM कर्मी
मामले में प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता समीर सहाय एवं अधिवक्ता तेजस्विता सफलता पक्ष रख रही है. उन्होंने बताया कि एक लंबे समय से बेहद ही कम वेतनमान में ANM महिला कर्मी राज्य के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में अपनी सेवा दे रही है 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी न्यूनतम वेतनमान और अनिश्चितता से गुजर रही है.
Also Read: Teesta Project पर चीन का बड़ा बयान, भारत की चिंताओं को बताया ‘अनावश्यक’


