रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के तहत हजारीबाग जिले में फ्लैट के आवंटन में गड़बड़ी को लेकर सख्त रवैया अपनाया है. कोर्ट ने हजारीबाग नगर निगम के नगर आयुक्त को आवंटन में हुई गड़बड़ी की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है. हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक एवं जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, कि हजारीबाग नगर निगम के नगर आयुक्त स्वयं मामले में 13 प्रतिवादियों (लाभार्थियों) के फ्लैट आवंटन की जांच करेंगे. इस दौरान याचिका करता संबंधित लाभार्थी और आवंटन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को अपना पक्ष रखने का भी अवसर दिया जाएगा.

शोकॉज नोटिस का भी निपटारा नगर आयुक्त करेंगे
वहीं, नगर आयुक्त को 6 महीने के अंदर कर नियुक्त आदेश पारित कर सभी पक्षों को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है. अदालत में यह भी कहा कि याचिकाकर्ता को जारी किए गए शोकॉज नोटिस का भी निपटारा नगर आयुक्त करेंगे. कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के आवंटन में भी कोई गड़बड़ी है, तो उस पर भी कार्रवाई करें. वहीं, मामले को निष्पादित भी कर दिया गया.
शिकायत के बाद भी नगर निगम ने नहीं की कोई कार्रवाई
दरअसल, सोनी कुमारी नामक एक याचिकाकर्ता ने यह आरोप लगाया था, कि प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत 13 ऐसे लोगों को फ्लैट आवंटन कर दिया गया है, जो इसकी अर्हता पूरी नहीं करते हैं और पात्रता और मानदंड से बाहर हैं. उसके बावजूद नगर निगम ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है. याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि शिकायतों की अनदेखी करते हुए उल्टा उनको ही शोकॉज नोटिस जारी कर दिया गया है. वहीं, उनके आवंटन को भी गलत बता दिया गया था, जिसके बाद से उन्होंने झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
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