Jharia: बीसीसीएल (BCCL) के सीएमडी मनोज कुमार ने बस्ताकोला क्षेत्र के राजापुर परियोजना कोयला फेस में पिछले एक साल से जमा पानी की समस्या को लेकर कड़ा रुख अपनाया है. निरीक्षण के दौरान उन्होंने जल निकासी की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जताते हुए स्थानीय प्रबंधन को सख्त निर्देश जारी किए.
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निरीक्षण के मुख्य बिंदु
धीमी कार्यशैली पर नाराजगी: सीएमडी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान गति से पानी निकासी में वर्षों लग जाएंगे, जो स्वीकार्य नहीं है.
युद्धस्तर पर कार्रवाई: उन्होंने तुरंत अतिरिक्त पंप लगाने और जल निकासी कार्य को ‘युद्धस्तर’ पर तेज करने का आदेश दिया.
मानसून की चेतावनी: सीएमडी ने अधिकारियों को आगाह किया कि मानसून आने से पहले स्थिति पर नियंत्रण पाना अनिवार्य है, अन्यथा समस्या और भी गंभीर हो सकती है.
समस्या का मूल कारण और तकनीकी समाधान
स्थानीय प्रबंधन और देवप्रभा आउटसोर्सिंग के निदेशक लाल बाबू सिंह ने निरीक्षण के दौरान बताया कि चटकारी नदी (चटकारी जोरिया) का पानी लगातार माइन क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है.

ठोस कदम उठाने के दिए गए निर्देश
चटकारी जोरिया का डायवर्सन: नदी के पानी को मोड़ने (डायवर्सन) के लिए मरम्मत कार्य तुरंत शुरू किया जाएगा.
स्थायी व्यवस्था: सीएमडी ने निर्देश दिया कि डायवर्सन इस तरह किया जाए कि राजापुर सहित आसपास की अन्य परियोजनाओं में दोबारा जलभराव की स्थिति पैदा न हो.
तकनीकी विश्लेषण: भूमिगत कोयला उत्पादन क्षेत्र के नक्शे (Map) के आधार पर तकनीकी टीम जल निकासी का खाका तैयार करेगी.
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भविष्य की योजना: ‘मेगा प्रोजेक्ट’ का लक्ष्य
सीएमडी मनोज कुमार ने केवल वर्तमान समस्या के समाधान पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की उत्पादकता पर भी जोर दिया. उन्होंने घोषणा की कि इस माइन को एक ‘मेगा प्रोजेक्ट’ के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में कोयला उत्पादन को उसकी अधिकतम क्षमता तक बढ़ाया जा सके.
