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रेप केस में HC ने हजारीबाग SP से पूछा- पांच दिन बाद भी आरोपी क्यों नहीं पकड़े गए? गड़बड़ी हुई तो SP स्वयं जिम्मेवार होंगे

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म और उसके बाद हुई नृशंस हत्या के मामले...

रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग जिले में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दुष्कर्म और उसके बाद हुई नृशंस हत्या के मामले में गंभीर संज्ञान लेते हुए एक जनहित याचिका दर्ज की है. अदालत ने इस मामले में पुलिस की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई है. इस मामले को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के समक्ष रखे जाने से पहले जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अनुभा रावत चौधरी की खंडपीठ के समक्ष रखा गया. सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और हजारीबाग के एसपी को नोटिस जारी कर शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने कहा- जांच में गंभीर लापरवाही

अदालत ने डीजीपी से पूछा गया है कि घटना के पांच दिन बीत जाने के बाद भी एफएसएल (फोरेंसिक साइंस लैब) को सैंपल क्यों नहीं भेजे गए? कोर्ट ने इसे जांच में गंभीर लापरवाही बताते हुए पीड़िता के परिवार और गवाहों की सुरक्षा की जिम्मेदारी एसपी हजारीबाग की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की गई है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि इस दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसके लिए एसपी स्वयं जिम्मेदार होंगे. इसके साथ ही अदालत ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (जेएचएएलएसए) की सदस्य सचिव को निर्देश दिया गया है, कि वे जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डीएलएसए) के माध्यम से जांच अधिकारी के साथ समन्वय स्थापित करें, ताकि साक्ष्यों से छेड़छाड़ न हो सके.

अब तक सैंपल एफएसएल नहीं भेजे गए

अदालत में अमीकस क्यूरी (मित्र न्यायाधीश) अधिवक्ता हेमंत शिकरवार ने ’अखबार में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए, बताया कि 24 मार्च 2026 को हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र में एक 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया और उसकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. हेमंत शिकरवार ने बताया कि पीड़िता की जीभ काट दी गई थी और गुप्तांगों पर गंभीर हमला किया गया था. एफआईआर 25 मार्च को दर्ज हुई, लेकिन आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी थी. सुनवाई के दौरान हजारीबाग के एसपी अंजनी अंजन वर्चुअल माध्यम से पेश हुए.

जब कोर्ट ने पूछा कि आरोपी को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो एसपी ने बताया कि तकनीकी टीम की मदद से मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपियों की संलिप्तता जोड़ी जा रही है. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अब तक सैंपल एफएसएल नहीं भेजे गए हैं, जिस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा लगता है, कि जांच अधिकारी ठीक से काम नहीं कर रहा है. अदालत ने स्पष्ट किया कि सैंपल एफएसएल भेजने के लिए किसी अदालत से अनुमति लेना जरूरी नहीं है, यह जांच अधिकारी का क्षेत्र है. कोर्ट ने कहा कि सैंपल को पास रखने से उनके साथ छेड़छाड़ की आशंका बढ़ जाती है.

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