झारखंड विधानसभा: सरकारी हेलीकॉप्टर की खरीद बनाम किराया, सदन में तीखी बहस

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी हेलीकॉप्टर और चार्टर विमानों के उपयोग और उनकी खरीद को लेकर सदन में...

रांची: झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकारी हेलीकॉप्टर और चार्टर विमानों के उपयोग और उनकी खरीद को लेकर सदन में जोरदार बहस हुई. विपक्षी विधायकों ने निजी एजेंसियों को अरबों रुपये के भुगतान पर सवाल उठाते हुए सरकार से अपनी विमानन सेवा शुरू करने की मांग की, जबकि सरकार ने तकनीकी और वित्तीय कारणों का हवाला देते हुए किराए के विकल्प को ही बेहतर बताया.

Also Read : झारखंड विधानसभा: फार्मेसी काउंसिल में प्रभारी निबंधन सचिव की नियुक्ति पर हंगामा, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के आदेश

निजी एजेंसियों द्वारा पैसे के दोहन का आरोप

विधायक शशि भूषण मेहता ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार वर्तमान में निजी एजेंसियों के माध्यम से हेलीकॉप्टर और विमानों का उपयोग कर रही है, जिसका किराया अरबों रुपये तक पहुंच जाता है. उन्होंने आरोप लगाया कि प्राइवेट एजेंसियों के माध्यम से सरकारी खजाने का दोहन हो रहा है. मेहता ने सीधा सवाल किया, क्या सरकार की मंशा अपना हेलीकॉप्टर खरीदने की है ताकि जनता के पैसे की बचत हो सके.

Also Read : झारखंड पुलिस में बड़े बदलाव की तैयारी: 64 साल पुराना मैनुअल होगा रिटायर, 6 माह में लागू होगा नया नियम

हादसे और जवाबदेही पर घेरा

बहस के दौरान शशि भूषण मेहता ने लातेहार हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि एक निजी कंपनी के हेलीकॉप्टर से जुड़े हादसे में सात लोगों की अकाल मृत्यु हुई, लेकिन किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली. उन्होंने तर्क दिया,अगर सरकार का अपना हेलीकॉप्टर होता, तो जवाबदेही तय होती. मृतकों के परिजनों को कम से कम पांच करोड़ रुपये का मुआवजा मिलना चाहिए था, लेकिन कुछ नहीं मिला. उन्होंने इस बात पर भी हैरानी जताई कि सरकार ने उसी कंपनी को फिर से संबद्धता दे दी है. इस पर मंत्री इरफान अंसारी ने जवाब देते हुए कहा कि चतरा की घटना अत्यंत पीड़ादायक है. उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि संबंधित कंपनी पर फिलहाल रोक लगा दी गई है और डीजीसीए मामले की जांच कर रहा है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रभावितों को हर हाल में मुआवजा दिया जाएगा.

Also Read : झारखंड के हर जिले में बनेगी एंटी-ड्रग टास्क फोर्स, विधानसभा में गूंजा मुद्दा

सरकार का तर्क, खरीदना क्यों नहीं है फायदेमंद?

विधायक नवीन जयसवाल ने भी सरकार से एक वित्तीय वर्ष में चार्टर विमानों पर होने वाले कुल खर्च का ब्योरा मांगा और खरीद प्रक्रिया में देरी पर सवाल उठाया.
जवाब में मंत्री दीपक बिरुआ ने स्पष्ट किया कि नया हेलीकॉप्टर खरीदना फिलहाल सरकार की प्राथमिकता नहीं है. उन्होंने इसके पीछे के कारणों को विस्तार से बताया एक नए हेलीकॉप्टर की कीमत 80 करोड़ से 100 करोड़ के बीच होती है. हेलीकॉप्टर के रखरखाव, पायलटों की नियुक्ति और तकनीकी परिचालन के चलते खुद का विमान रखना काफी महंगा और जटिल सौदा है. बिहार, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्य भी अपनी जरूरतों के लिए निजी एजेंसियों से ही सेवाएं लेते हैं.
दिलचस्प बात यह रही कि जहां एक ओर विपक्ष के कुछ सदस्य खरीद की वकालत कर रहे थे, वहीं वरिष्ठ भाजपा नेता सीपी सिंह ने सरकार के जवाब का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि तकनीकी दृष्टि से अपना विमान या हेलीकॉप्टर खरीदना और उसका रखरखाव करना लाभदायक नहीं होता, इसलिए भाड़े पर लेने की व्यवस्था ही व्यवहारिक रूप से सही है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *