Ranchi: झारखंड विधानसभा की कार्यवाही मंगलवार को हंगामे के साथ शुरू हुई. सदन शुरू होते ही भारतीय जनता पार्टी के विधायक विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में उतर आए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी.

अल्पसंख्यक विद्यालयों का मुद्दा और विपक्ष का तेवर
कार्यवाही के दौरान माले विधायक अरूप चटर्जी ने शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अल्पसंख्यक विद्यालयों में कक्षा 1 से 6 तक के बच्चों को अभी तक ड्रेस और पाठ्य पुस्तक सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई है. विपक्ष के लगातार हंगामे को देखते हुए संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने हस्तक्षेप किया. उन्होंने विधायकों से अपील करते हुए कहा आप सभी अपनी जगह पर बैठें. आपके जो भी सवाल हैं, उन्हें नियम के तहत सरकार के सामने लाएं, हम हर सवाल का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं.मंत्री के आश्वासन के बाद विपक्षी विधायक अपनी सीटों पर वापस लौटे.
बाबूलाल मरांडी का हमला, अबुआ नहीं बबुआ सरकार
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कानून व्यवस्था के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि इसे अबुआ सरकार कहा जाता है, लेकिन असल में यह बबुआ सरकार है. मरांडी ने पाकुड़ और गिरिडीह की हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि राज्य में अधिकारी बेलगाम हो चुके हैं. उन्होंने मांग की कि अन्य सभी कार्यों को स्थगित कर राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चर्चा कराई जाए. इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री ने पलटवार करते हुए कहा कि सदन नियमों से चलता है. कल ही कार्यमंत्रणा की बैठक हुई थी, जिसमें विपक्ष ने इन मुद्दों का कोई जिक्र नहीं किया.उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल सुर्खियों में रहने के लिए सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है.
सदन में हाई-वोल्टेज ड्रामा, मार्शल आउट का आदेश
कार्यवाही के दौरान स्थिति तब और बिगड़ गई जब सत्ता पक्ष के मंत्री सुदिव्य सोनू और आजसू विधायक निर्मल महतो के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई. विवाद इतना बढ़ गया कि विधानसभा अध्यक्ष ने कड़ी नाराजगी जताते हुए निर्मल महतो को मार्शल आउट का निर्देश दे दिया.
मार्शल आउट का विरोध और सुलह की कोशिश
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पीकर के इस फैसले पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा ट्रेजरी बेंच के सदस्यों को विपक्ष को उकसाना नहीं चाहिए. यदि कोई नया सदस्य अपनी पीड़ा या क्षेत्र की बात रख रहा है, तो उन्हें मौका मिलना चाहिए. हालांकि, स्पीकर ने स्पष्ट किया कि विधायक का आचरण सदन की गरिमा के अनुकूल नहीं था. बाद में माहौल को शांत करने के लिए संसदीय कार्य मंत्री ने ही स्पीकर से आग्रह किया कि निर्मल महतो को वापस सदन में बुलाया जाए. इसके बाद स्पीकर ने पक्ष और विपक्ष के एक-एक सदस्य को उन्हें वापस लाने के लिए भेजा.

