Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और जिला प्रशासन को करारा झटका देते हुए एक ट्रक मालिक की याचिका पर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने वैधानिक समय-सीमा समाप्त होने से पहले ही वाहन को गैर-कानूनी तरीके से नीलाम करने के मामले में राज्य सरकार को पीड़ित ट्रक मालिक को 3 लाख रुपए का मुआवजा देने और दो सप्ताह के भीतर ट्रक वापस लौटाने का निर्देश दिया है.
क्या था पूरा मामला?
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों ने झारखंड लघु खनिज रियायत नियमावली 2004 के तहत पुनरीक्षण (रिविजन) याचिका दाखिल करने के लिए तय 60 दिनों की अवधि का इंतजार किए बिना अनुचित जल्दबाजी दिखाई. दिसंबर 2021 में बालूमाथ पुलिस ने अशोक सिंह के हाईवा ट्रक को अवैध कोयला परिवहन के आरोप में जब्त किया था. फरवरी 2023 में लातेहार के उपायुक्त ने वाहन को जब्त कर उसकी नीलामी का आदेश दिया और 8 मार्च 2023 को इसे नीलाम कर दिया गया. हालांकि ट्रक मालिक के पास इस जब्ती आदेश के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए 60 दिनों का कानूनी समय था.
समय रहते दाखिल की गई थी पुनरीक्षण याचिका
याचिकाकर्ता ने 22 मार्च 2023 को (समय-सीमा के भीतर) खान आयुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की. खान आयुक्त ने मई 2025 में फैसला सुनाते हुए कहा कि जब्ती आदेश बिना क्षेत्राधिकार वाले प्राधिकरण द्वारा दिया गया था और लागू रॉयल्टी व जुर्माना चुकाने के बाद ट्रक छोड़ने का आदेश दिया. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि नीलामी न केवल वैधानिक अवधि समाप्त होने से पहले की गई बल्कि वाहन मालिक को कोई व्यक्तिगत नोटिस भी नहीं भेजा गया. समाचार पत्रों में सामान्य विज्ञापन को व्यक्तिगत नोटिस का विकल्प नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों की इस गंभीर गैर-कानूनी कार्रवाई और अकारण जल्दबाजी से याचिकाकर्ता को भारी मानसिक व आर्थिक उत्पीड़न झेलना पड़ा.
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हाईकोर्ट का अंतिम आदेश
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यदि अधिक मुआवजे का दावा करना चाहता है तो वह सक्षम सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है. नीलामी में वाहन खरीदने वाले व्यक्ति ने उसमें मरम्मत और खरीद मूल्य मिलाकर 43 लाख के दावों की मांग की थी. अदालत ने पाया कि खरीदार ने लगभग तीन साल तक ट्रक का व्यावसायिक उपयोग किया है और उसे 26.57 लाख (ब्याज सहित) वापस मिल चुके हैं जो पर्याप्त हैं. अदालत ने याचिका का निष्पादन करते हुए दो सप्ताह के भीतर पीड़ित को ट्रक सौंपने और 3 लाख रुपए मुआवजा भुगतान सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए हैं.
