नई शहरी जलापूर्ति योजना में पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल, अनुमति को लेकर जांच की मांग

अमित वर्मा Lohardaga: लोहरदगा शहर में नई शहरी जलापूर्ति योजना के तहत बनने वाली पानी टंकी के निर्माण कार्य को लेकर विवाद...

अमित वर्मा 

Lohardaga: लोहरदगा शहर में नई शहरी जलापूर्ति योजना के तहत बनने वाली पानी टंकी के निर्माण कार्य को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल कार्यालय परिसर में निर्माण कार्य के दौरान करीब आधा दर्जन गमहार के पेड़ों की कटाई किए जाने का मामला सामने आया है. पेड़ों की कटाई को लेकर अब अनुमति, पर्यावरणीय नियमों और विभागीय प्रक्रिया पर कई सवाल उठ रहे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी ने बिना संबंधित विभागों को सूचना दिए पेड़ों की कटाई कर दी, जबकि प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई थी.

स्थानीय लोगों ने लगाया बिना अनुमति पेड़ काटने का आरोप 

जानकारी के अनुसार, नई शहरी जलापूर्ति योजना के अंतर्गत परिसर में पानी की ऊंची टंकी का निर्माण कराया जा रहा है. इसी निर्माण कार्य के लिए परिसर में मौजूद गमहार के बड़े और छोटे पेड़ों को काट दिया गया. बताया जा रहा है कि पेड़ों की कटाई हाइड्रा मशीन की सहायता से की गई. कटे हुए पेड़ों के तनों और शाखाओं को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर निर्माण स्थल से अलग-अलग स्थानों पर रख दिया गया. स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कटे हुए पेड़ों को छिपाने का प्रयास किया गया ताकि मामला अधिक तूल न पकड़ सके.

अनुमति को लेकर उठे सवाल

पेड़ों की कटाई की जानकारी सामने आने के बाद लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया है कि क्या निर्माण एजेंसी ने वन विभाग और अंचल प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त की थी. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े नियमों के तहत किसी भी सरकारी या सार्वजनिक परिसर में पेड़ों की कटाई के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है. ऐसे में बिना अनुमति पेड़ों की कटाई किए जाने की आशंका ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है.

सदर अंचलाधिकारी बोले- नहीं दी गई कोई जानकारी 

इस संबंध में जब सदर अंचलाधिकारी रामनारायण खालको से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि जहां तक उनकी जानकारी है, पेड़ों की कटाई के लिए उनके कार्यालय से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.

Read Also: नामकुम में बनेगा आधुनिक आयुष ड्रग टेस्टिंग लैब, भवन निर्माण के लिए 63.53 लाख मंजूर

वन विभाग ने भी शुरू की जांच

उधर, वन विभाग के प्रभारी फॉरेस्टर विक्की कुमार महतो ने भी कहा कि विभाग को पेड़ों की कटाई की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने बताया कि मामले की जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि किसकी अनुमति से पेड़ों की कटाई की गई. यदि जांच में यह सामने आता है कि बिना वैधानिक अनुमति के पेड़ काटे गए हैं तो संबंधित एजेंसी के विरुद्ध वन एवं पर्यावरण से जुड़े प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.

निर्माण एजेंसी का दावा- विभागीय प्रक्रिया अपनाई गई

वहीं निर्माण कार्य कर रही एजेंसी के प्रोजेक्ट मैनेजर रविंद्र कुमार ने कहा कि संबंधित विभाग से विभागीय स्तर पर अनुमति की प्रक्रिया अपनाई गई है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय में वे इससे अधिक जानकारी देने की स्थिति में नहीं हैं. उनके इस बयान के बाद यह सवाल और गहरा गया है कि यदि अनुमति की प्रक्रिया अपनाई गई थी तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं है.

विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण भी जरूरी

नई शहरी जलापूर्ति योजना शहरवासियों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की एक महत्वपूर्ण परियोजना मानी जा रही है. लेकिन विकास कार्यों के दौरान पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई जरूरी हो, तो नियमानुसार अनुमति लेने के साथ-साथ प्रतिपूरक वृक्षारोपण भी कराया जाना चाहिए, ताकि पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके.

जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर 

फिलहाल पेड़ों की कटाई को लेकर प्रशासन और वन विभाग दोनों ने जांच की बात कही है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है. यह मामला विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता को भी उजागर करता है.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *