झारखंड: जब पुलिसिया जांच के आगे पस्त हुई सियासत और शांत हुआ जनाक्रोश 

  SAURAV SINGH रांची: झारखंड में पिछले तीन महीने के दौरान दो ऐसी घटनाएं सामने आईं जिसने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा...

 

SAURAV SINGH

रांची: झारखंड में पिछले तीन महीने के दौरान दो ऐसी घटनाएं सामने आईं जिसने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी. इन मामलों में न केवल कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे, बल्कि सियासी गलियारों में भी खूब हलचल मची. एक ओर जहां राजधानी रांची के धुर्वा से दो मासूमों का अपहरण पुलिस के लिए चुनौती बन गई, वहीं हजारीबाग के विष्णुगढ़ में 12 वर्षीय बच्ची की हत्या ने मानवता को शर्मसार कर दिया था. इन दोनों ही मामलों में राजनीतिक दलों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और बंद का आह्वान किया, लेकिन अंततः दोनों मामले का खुलासा हो गया. इन दोनों मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जहां एक ओर आपराधिक घटनाओं पर राजनीति चरम पर रहती है, वहीं पुलिस के पास मामले का खुलासा करना ही एकमात्र जरिया है, जिससे जनता का विश्वास पुनः बहाल किया जा सकता है. जहां रांची में बच्चों की जान बच गई, वहीं हजारीबाग की घटना समाज के माथे पर एक काला कलंक छोड़ गई.

रांची: धुर्वा से लापता भाई-बहन की सकुशल बरामदगी:

रांची के धुर्वा इलाके से 2 जनवरी को लापता हुए भाई-बहन, अंश और अंशिका, के मामले ने पूरे शहर में दहशत फैला दी थी. 12 दिनों तक चले इस सस्पेंस का अंत 14 जनवरी को हुआ, जब एसएसपी राकेश रंजन के नेतृत्व में रांची पुलिस की टीम ने उन्हें रामगढ़ जिले के चितरपुर (अहमदनगर) से सकुशल बरामद किया था. पुलिस ने मौके से एक 25 वर्षीय युवक (बिहार निवासी) और एक 19 वर्षीय युवती को गिरफ्तार किया. दोनों आरोपी खुद को पति-पत्नी बताकर चितरपुर में किराए के मकान में रह रहे थे. उन्होंने मकान मालिक को झांसा दिया था कि बच्चे उनके अपने हैं.

इस अपहरण कांड ने देखते ही देखते राजनीतिक मोड़ ले लिया था:

इस अपहरण कांड ने देखते ही देखते राजनीतिक मोड़ ले लिया था. 11 जनवरी को आरजेडी प्रदेश महासचिव कैलाश यादव के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने धुर्वा बंद का आह्वान किया, जिससे सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा. वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और हेमंत सरकार पर प्रशासनिक नाकामी का आरोप लगाते हुए इसे विधानसभा तक ले जाने की चेतावनी दी थी.

हजारीबाग: अंधविश्वास की वेदी पर चढ़ी मासूम की जान:

हजारीबाग के विष्णुगढ़ से एक ऐसी रूह कंपा देने वाली घटना आई, जिसने यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या आज भी समाज अंधविश्वास की बेड़ियों में जकड़ा है. पुलिस के तर्क के मुताबिक यहां एक मां ने बीते 24 मार्च की रात अपनी 13 साल की बेटी की बलि चढ़ा दी. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मृतिका की मां रेशमी देवी, बीजेपी नेता भीम राम और एक महिला तांत्रिक शांति देवी को गिरफ्तार किया. जांच में पाया गया कि तांत्रिक के बहकावे में आकर अपनी ही कोख से जन्मी संतान की जान ले ली गई.

बंद का आह्वान और पुलिस की सफलता:

इस हत्याकांड के विरोध में हजारीबाग में भारी आक्रोश देखा गया था. 30 मार्च को हजारीबाग बंद भी बुलाया गया था. विपक्षी दलों ने कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए पहले हजारीबाग बंद और फिर तीन अप्रैल को पूरे झारखंड बंद का ऐलान कर दिया था. इससे पहले कि स्थिति और बिगड़ती, हजारीबाग पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया. पुलिस द्वारा मामले का पूर्ण खुलासा किए जाने के बाद बीजेपी और अन्य संगठनों ने प्रस्तावित बंद को वापस ले लिया.

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