रांची: झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने राज्य सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा उठाते हुए ऑफिस बॉय और डाटा एंट्री ऑपरेटर संवर्ग के साथ हो रहे कथित अन्याय पर कड़ी नाराजगी जताई है. महासंघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की है.

जामताड़ा में 7 ऑफिस बॉय का पदावनत करने का आरोप
महासंघ का आरोप है कि जामताड़ा के जिला कार्यक्रम प्रबंधक (DPM) ने नियमों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 7 ऑफिस बॉय को उनके पद से हटाकर स्वीपर बना दिया. इतना ही नहीं, बिना अनुमति उनके बायोमेट्रिक अटेंडेंस पर भी रोक लगा दी गई, जिसे महासंघ ने पूरी तरह अन्यायपूर्ण बताया है. महासंघ ने संबंधित DPM को जामताड़ा से तत्काल हटाने की मांग की है.
नियुक्ति प्रक्रिया पर भी सवाल
महासंघ का कहना है कि सभी ऑफिस बॉय की नियुक्ति झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) के नियमों के तहत विज्ञापन और इंटरव्यू के माध्यम से हुई थी. ऐसे में पदावनति का निर्णय गलत और नियम विरुद्ध है.
वेतन में भारी भेदभाव
महासंघ ने वेतन असमानता का मुद्दा भी उठाया है. महासंघ ने कहा कि मुख्यालय रांची में कार्यरत ऑफिस बॉय को 18,000 से 29,000 रुपये तक मानदेय मिल रहा है, जबकि प्रखंड स्तर पर कार्यरत ऑफिस बॉय को मात्र 450 रुपये प्रतिदिन (वह भी सिर्फ कार्य दिवस पर) दिए जा रहे हैं. महासंघ ने इसे खुला भेदभाव बताया है और सभी 240 ऑफिस बॉय को समान वेतन देने की मांग की है.
न्यूनतम मानदेय और लेवल में शामिल करने की मांग
240 में से केवल 8 ऑफिस बॉय को मानव संसाधन नियमावली के लेवल-8 में शामिल किया गया है, बाकी 232 आज तक बाहर हैं. न्यूनतम 20,000 रुपये मासिक मानदेय अब तक लागू नहीं हुआ है. श्रम मंत्रालय द्वारा संशोधित 783 रुपये प्रतिदिन की दर भी लागू नहीं की गई है.
डाटा एंट्री ऑपरेटर भी परेशान
महासंघ ने डाटा एंट्री ऑपरेटर संवर्ग की समस्याएं भी उठाईं—
- इन्हें अब तक लेवल-7 में शामिल नहीं किया गया.
- अन्य विभागों में 40,900 रुपये तक मानदेय मिलता है, जबकि JSLPS में केवल 22,050 रुपये दिए जा रहे हैं.
- 15 किलोमीटर के दायरे में पोस्टिंग का नियम लागू नहीं हो रहा.
- स्थायी समायोजन की प्रक्रिया लंबित है.
सचिव और CEO ने दिया आश्वासन
ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार और मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी अनन्य मित्तल ने महासंघ को आश्वासन दिया है, कि समान काम के बदले समान वेतन देने पर विचार किया जाएगा और लंबित मांगों पर कार्रवाई होगी.
21 सूत्री मांगें अब भी लंबित
महासंघ ने बताया कि उसकी 21 सूत्री मांगें वर्षों से लंबित हैं. वर्ष 2023 में तत्कालीन प्रधान सचिव वंदना दादेल ने भी कार्रवाई के निर्देश दिए थे, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया.
मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं
महासंघ ने यह भी आरोप लगाया कि कई बार पत्र देने के बावजूद मुख्यमंत्री से मिलने का समय नहीं दिया गया है, जिससे राज्यकर्मियों, संविदाकर्मियों और आउटसोर्स कर्मियों में नाराजगी है.
महासंघ की चेतावनी
महासंघ ने कहा है कि यदि जल्द ही सभी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आगे आंदोलन की रणनीति बनाई जाएगी. महासंघ के पदाधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री हस्तक्षेप कर 240 गरीब और कमजोर कर्मचारियों को न्याय दिलाएंगे.
यह भी पढ़ें: रांची में बड़ा टैक्स घोटाला उजागर! 1.51 लाख की जगह 3.22 लाख वर्गफीट एरिया मिला, निगम की सख्त कार्रवाई

