Latehar: बालूमाथ प्रखंड अंतर्गत पिंडारकोम गांव में रविवार को बसिया पंचायत के ग्रामीणों की एक विशाल ग्रामसभा आयोजित की गई. जिसमें एनटीपीसी, सीसीएल और पीएनएम कंपनी के खिलाफ ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आया. ग्रामसभा में सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लेते हुए कंपनियों की कार्यशैली, हाईवा परिचालन, स्थानीय लोगों की उपेक्षा और विस्थापन संबंधी समस्याओं को लेकर जोरदार विरोध दर्ज कराया.
ग्रामसभा की अध्यक्षता ग्राम प्रधान रामकुमार यादव ने की. जबकि बसिया पंचायत की मुखिया बिमला देवी विशेष रूप से उपस्थित रहीं. मंच संचालन गंगेश्वर यादव ने किया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में झामुमो के फायरब्रांड नेता सौरभ श्रीवास्तव शामिल हुए. जिनके संबोधन ने आंदोलन को नई ऊर्जा दे दी.

ग्रामसभा को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन
सभा को संबोधित करते हुए सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि ग्रामसभा की अनुमति और सहमति के बिना हाईवा परिचालन शुरू करना संविधान प्रदत्त अधिकारों का सीधा उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि झारखंड की अबुआ सरकार ने ग्रामसभाओं को विशेष अधिकार दिए हैं और कंपनियों द्वारा उनकी अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियां बाहरी हाईवा वाहनों को प्राथमिकता देकर स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और मजदूरों को बेरोजगार करने की साजिश रच रही हैं. ग्रामीणों के अनुसार सीसीएल और पीएनएम की नीतियों के कारण लगभग 700 स्थानीय ट्रक काम से बाहर हो चुके हैं. जिससे सैकड़ों परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं.
ग्रामसभा में हाईवा परिचालन को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली. ग्रामीणों ने कहा कि तेज रफ्तार हाईवा वाहनों के कारण सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है. गांव के बच्चे स्कूल आने-जाने के दौरान जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं.
चौदह सूत्री प्रस्ताव पारित
ग्रामसभा में स्थानीय हितों एवं ग्रामीण अधिकारों को लेकर चौदह सूत्री प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव में ग्रामसभा को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों के तहत कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. साथ ही यह भी निर्णय लिया गया कि जल्द ही सीसीएल के सीएमडी से मिलकर पूर्व की तर्ज पर कोलियरी संचालन शुरू करने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने की मांग उठाई जाएगी.
तेतरियाखांड़ आंदोलन में ग्रामीणों का पलड़ा भारी
पिंडारकोम में उमड़ी भारी भीड़ और ग्रामीणों के समर्थन में सौरभ श्रीवास्तव की हुंकार के बाद पूरे बालूमाथ क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि तेतरियाखांड़ की लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. ग्रामीणों की एकजुटता और आंदोलन की बढ़ती ताकत को देखते हुए सीसीएल पर बंद पड़ी खदान को ग्रामीणों की मांग के अनुरूप जल्द खोलने का दबाव बढ़ता नजर आ रहा है.
ग्रामसभा ने साफ संकेत दे दिया है कि अब बिना स्थानीय सहमति के किसी भी कंपनी को गांव की जमीन, संसाधन और अधिकारों पर मनमानी नहीं करने दी जाएगी.
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