विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड शराब घोटाला में एसीबी की जांच जारी है और जैसे जैसे जांच आगे बढ़ रही है वैसे वैसे इस पुरे घोटाले की परतें खुलती जा रही हैं. एजेंसी की अब तक की जांच में यह जानकारी सामने आई है कि झारखंड स्टेट बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के जरिए सरकारी खजाने को करीब 448 करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान पहुंचाया गया है. यह खुलासा होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) शराब घोटाला से जुड़े पूरे सिंडिकेट और इसमें शामिल रसूखदारों की कड़ाई से जांच कर रहा है.

फर्जी बैंक गारंटी से खुली घोटाले की परतें
साल 2023 में JSBCL द्वारा खुदरा शराब दुकानों में मैनपावर सप्लाई के लिए दो एजेंसियों (मैसर्स विजन हॉस्पिटलिटी और मैसर्स मार्शन इनोवेटिव) को काम दिया गया था. लेकिन बाद में नियमों के उल्लंघन पर जब इन एजेंसियों की बैंक गारंटी भुनाने की कोशिश की गई तो पता चला कि जमा की गई बैंक गारंटियां पूरी तरह फर्जी और जाली थीं. यहीं से इस बड़े शराब घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुई.
नियमों को दरकिनार कर डिशिता वेंचर्स को मिला टेंडर
जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि घोटाला सिर्फ फर्जी बैंक गारंटी तक सीमित नहीं था बल्कि शराब की थोक सप्लाई के टेंडर आवंटन में भी भारी हेरफेर की गई थी. उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के नियमों के मुताबिक टेंडर पाने वाली कंपनी के लिए तीन साल का सेल्स टैक्स, प्रोफेशनल टैक्स या वैट (VAT) रिटर्न सर्टिफिकेट जमा करना अनिवार्य था.
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अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
लेकिन मैसर्स डिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड ने केवल दो साल के दस्तावेज जमा किए थे फिर भी टेंडर कमेटी के अधिकारियों से मिलीभगत कर नियमों को ताक पर रख दिया गया और कंपनी को थोक सप्लाई का लाइसेंस थमा दिया गया. एसीबी की केस डायरी के मुताबिक झारखंड में शराब के थोक व्यापार पर एकाधिकार जमाने के लिए एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था.
धीमी सप्लाई से राजस्व को हुआ भारी नुकसान
इस केस से जुड़े गवाहों के बयानों से खुलासा हुआ है कि डिशिता वेंचर्स और ओम साईं बेवरेजेस जैसी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारियों के इशारे पर खेल रचा गया. टेंडर हथियाने के बाद डिशिता वेंचर्स के डायरेक्टर और प्रबंधन ने जानबूझकर लोकप्रिय ब्रांड की शराब, विदेशी शराब और देसी शराब की सप्लाई को बेहद धीमा कर दिया. बाजार में भारी मांग के बावजूद शराब की कम और देरी से सप्लाई की गई जिससे सरकार के राजस्व को सीधे तौर पर 448 करोड़ की चपत लगी.


