हजारीबाग: झारखंड विधानसभा के चालू सत्र के दौरान शून्यकाल में बड़कागांव विधायक रौशन लाल चौधरी ने बड़कागांव प्रखंड अंतर्गत महुदी गांव से जुड़े रामनवमी जुलूस के मुद्दे को गंभीरता से सदन के समक्ष उठाया. उन्होंने कहा कि यह विषय क्षेत्र की आस्था, परंपरा और सामाजिक सौहार्द से जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार और प्रशासन को इसे संवेदनशीलता के साथ देखना चाहिए.

1989 से 2018 तक जुलूस पर रही पाबंदी
विधायक रौशन लाल चौधरी ने सदन को अवगत कराते हुए कहा कि वर्ष 1984 में लौटती रामनवमी जुलूस के दौरान झंडा जलाने की घटना के बाद प्रशासन द्वारा वर्ष 1989 से 2018 तक जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी गई थी. इसके बाद वर्ष 2018 में दोनों समुदायों के बीच आपसी समझौते और सौहार्दपूर्ण पहल से पुनः तिरंगा यात्रा के साथ रामनवमी जुलूस की परंपरा शुरू हुई, जो क्षेत्र में भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन गया था.
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2024 में जुलूस रोकने पर जताई आपत्ति
उन्होंने कहा कि वर्ष 2024 में शांतिपूर्ण ढंग से निकाले जा रहे रामनवमी जुलूस को प्रशासन द्वारा बैरिकेडिंग, लाठीचार्ज और फायरिंग कर रोक दिया गया, जो धार्मिक स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध है. इस प्रकार की कार्रवाई से स्थानीय लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं.
2026 में जुलूस की अनुमति देने की मांग
विधायक रौशन लाल चौधरी ने सदन के माध्यम से राज्य सरकार और प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि वर्ष 2026 में महुदी गांव से निकलने वाले रामनवमी जुलूस को शांतिपूर्ण और विधिवत रूप से निकालने की अनुमति प्रदान की जाए, ताकि क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही परंपरा, आस्था और सामाजिक सद्भाव कायम रह सके.
संवाद के जरिए समाधान की अपील
उन्होंने कहा कि प्रशासन को सभी पक्षों से संवाद स्थापित कर ऐसा वातावरण बनाना चाहिए, जिससे यह धार्मिक आयोजन पूरी शांति और सौहार्द के साथ संपन्न हो सके. महुदी में रामनवमी का जुलूस निकालने पर फिलहाल प्रशासनिक पाबंदी है और इस मार्ग पर जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जाती है. अतीत में कई बार इस क्षेत्र में तनाव और दंगे की घटनाएं भी हो चुकी हैं, इसलिए इस विषय को संवेदनशीलता के साथ हल करने की आवश्यकता है.

