हजारीबाग में फिर गरमाया 108 एम्बुलेंस का मामला: पूरी तरह घिसे ‘प्लेन’ टायरों के भरोसे दौड़ रही हैं ‘सरकारी एंबुलेंस’, चतरा-हजारीबाग रोड पर टला बड़ा हादसा

Hazaribagh : कड़कड़ाती धूप के बीच चतरा-हजारीबाग मुख्य मार्ग पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. चतरा से एक गंभीर मरीज को...

Hazaribagh : कड़कड़ाती धूप के बीच चतरा-हजारीबाग मुख्य मार्ग पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया. चतरा से एक गंभीर मरीज को रेफर कर हजारीबाग ला रही 108 आपातकालीन एम्बुलेंस का टायर अचानक चलते वाहन में फट गया. चालक की सूझबूझ और सतर्कता के कारण एम्बुलेंस अनियंत्रित होने के बावजूद सड़क से नीचे नहीं उतरी और एक बड़ी दुर्घटना टल गई. यदि वाहन पलट जाता तो मरीज, उसके परिजन और एम्बुलेंस कर्मियों की जान जोखिम में पड़ सकती थी. घटना के बाद सहमे हुए मरीज के परिजनों ने तत्काल निजी वाहन की व्यवस्था की और मरीज को लेकर वहां से रवाना हो गए. हालांकि इस घटना ने एक बार फिर राज्य की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

सभी छह टायर पूरी तरह घिस चुके हैं

हादसे के बाद एम्बुलेंस चालक ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए बताया कि वाहन के सभी छह टायर पूरी तरह घिसकर प्लेन हो चुके हैं. चालक के अनुसार, पिछले चार महीनों से लगातार अधिकारियों को टायर बदलने और आवश्यक मेंटेनेंस कराने की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है. चालक ने कहा, “हम लोग बहुत भाग्यशाली थे कि आज बच गए. यदि वाहन थोड़ा भी ज्यादा अनियंत्रित होता तो एम्बुलेंस झाड़ियों में पलट सकती थी. हम लगातार बता रहे हैं कि गाड़ी की स्थिति खराब है, लेकिन हमारी बात सुनने वाला कोई नहीं है.

वेतन नहीं मिलने से बढ़ी परेशानी

मामला केवल खराब वाहनों और घिसे टायरों तक सीमित नहीं है. एम्बुलेंस कर्मियों ने सेवा संचालन करने वाली एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर वेतन भुगतान में देरी का भी आरोप लगाया है. कर्मियों का कहना है कि उन्हें पिछले दो से तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. उनका आरोप है कि एक ओर उन्हें जर्जर वाहनों में अपनी जान जोखिम में डालकर काम करना पड़ रहा है, वहीं दूसरी ओर समय पर वेतन भी नहीं मिल रहा है. एक चालक ने कहा, “घर-परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. लगातार ड्यूटी कर रहे हैं, लेकिन महीनों से वेतन नहीं मिला है.

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना के बाद हजारीबाग समेत पूरे राज्य में 108 एम्बुलेंस सेवा के संचालन और रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं. लोगों का कहना है कि यदि आपातकालीन सेवाओं में उपयोग होने वाले वाहनों के टायर तक समय पर नहीं बदले जा रहे हैं, तो आम लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी. स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने प्रशासन से मांग की है कि एम्बुलेंस वाहनों की तकनीकी जांच कराकर तत्काल आवश्यक मरम्मत और टायर बदलने की व्यवस्था की जाए. साथ ही लंबित वेतन का भुगतान भी जल्द किया जाए, ताकि कर्मचारी बिना किसी अतिरिक्त मानसिक और आर्थिक दबाव के अपनी सेवाएं दे सकें. फिलहाल, इस घटना के बाद हजारीबाग में 108 एम्बुलेंस सेवा के प्रबंधन और संचालन को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है. अब लोगों की नजर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है.

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