हजारीबाग: शिक्षा विभाग में लंबे समय से एक ही जिले में अपनी जड़ें जमाए बैठे अधिकारियों के खिलाफ अब विभाग ने सख्त रुख अपनाना शुरू कर दिया है. हजारीबाग जिले में पिछले एक दशक से पदस्थापित प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (BEEO) नागेश्वर सिंह को आखिरकार जिला शिक्षा अधीक्षक ने विरमित कर दिया है. उल्लेखनीय है कि न्यूज वेभ के द्वारा बीते 13 मार्च को इस खबर को “दस वर्षों से जिले में जमे BEEO, छह प्रखंडों का प्रभार, कोडरमा तबादले के बाद भी नहीं दिया योगदान” हेडिंग से प्रकाशित किया गया था. यह कार्रवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि नागेश्वर सिंह का तबादला इसी वर्ष जनवरी में कोडरमा जिले में कर दिया गया था, लेकिन वे पद छोड़ने को तैयार नहीं थे.

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खबर का असर: न्यूज वेभ ने उठाई थी आवाज
गौरतलब है कि नागेश्वर सिंह के विरमन को लेकर न्यूज वेव’ ने प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी. इसके बाद विभाग हरकत में आया.दो दिन पूर्व ही हजारीबाग के डीएसई आकाश कुमार ने स्पष्ट संकेत दिए थे कि यदि वे स्वतः विरमित नहीं होते हैं, तो उन्हें विभागीय आदेश के जरिए हटाया जाएगा. इसी कड़ी में गुरुवार को उन्हें आधिकारिक तौर पर विरमित कर दिया गया.
एक अधिकारी, छह प्रखंड: मल्टी-प्रभार का दिलचस्प मामला
नागेश्वर सिंह हजारीबाग में न केवल जमे हुए थे, बल्कि उनके पास जिले के छह महत्वपूर्ण प्रखंडों का प्रभार भी था. वे एक सा सदर और नगर (हजारीबाग), टाटीझरिया, दारू, कटकमदाग और इचाक प्रखंडों का प्रभार में थे. प्राथमिक शिक्षा निदेशक मनोज कुमार रंजन ने 16 जनवरी को ही उनके तबादले का आदेश जारी किया था, लेकिन इस आदेश के बावजूद वे हजारीबाग में ही बने रहने की कोशिशों में जुटे थे.
कोडरमा में शिक्षा विभाग को था इनका इंतजार
कोडरमा जिले में शिक्षा विभाग वर्तमान में अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है. वहां फिलहाल एक भी स्थायी BEEO पदस्थापित नहीं है. अब नागेश्वर सिंह को कोडरमा सदर के साथ-साथ डोमचांच और सतगांवा प्रखंडों का अतिरिक्त प्रभार भी संभालना होगा. शिक्षा विभाग द्वारा की गई इस कार्रवाई ने उन अधिकारियों को कड़ा संदेश दिया है जो रसूख या अन्य कारणों से तबादले के बाद भी पुरानी जगहों पर जमे रहते हैं. मल्टी-प्रभार के इस खेल के खत्म होने से विभाग में पारदर्शिता और नियमों के पालन की नई उम्मीद जगी है.

