Ranchi : झारखंड में इलाज के नाम पर मौत का सौदा करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों की बड़ी संख्या का खुलासा हुआ है. स्वास्थ्य विभाग की आंतरिक रिपोर्ट के अनुसार राज्य के 24 जिलों में 5000 से अधिक अवैध डॉक्टर और क्लीनिक सक्रिय हैं, जिनके पास न तो कोई वैध डिग्री है और न ही इलाज करने का कानूनी अधिकार. हजारीबाग, गढ़वा, पलामू, गिरिडीह और देवघर जैसे जिलों के ग्रामीण इलाकों में इनका जाल सबसे ज्यादा फैला हुआ है. हाल के दिनों में रांची और जमशेदपुर से भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां मेडिकल छात्र बिना आवश्यक परीक्षा पास किए फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर इलाज कर रहे हैं.
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‘नो डिग्री, नो प्रैक्टिस’ पर सख्ती, कार्रवाई की तैयारी
स्वास्थ्य विभाग ने अब इन झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है. निदेशक प्रमुख डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने सभी जिलों के सिविल सर्जनों को क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के तहत अस्पतालों के सत्यापन का निर्देश दिया है. साथ ही बिना रजिस्ट्रेशन एलोपैथिक दवा और इंजेक्शन देने वालों पर सीधे एफआईआर दर्ज करने को कहा गया है. विभाग ने बड़े स्तर पर चल रहे फर्जीवाड़े की जांच के लिए सीबीआई जांच और नेशनल ऑडिट की भी जरूरत जताई है, ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाया जा सके.
