रांची: झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों पर लगे आरोपों की सूची लगातार लंबी होती जा रही है. अब सिर्फ अंचलाधिकारी (सीओ) ही नहीं, बल्कि प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) भी भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में घिरते नजर आ रहे हैं. राज्य गठन के बाद से अब तक 150 से अधिक बीडीओ अलग-अलग मामलों में निलंबित किए जा चुके हैं.
रिश्वतखोरी से लेकर गबन तक, कई गंभीर आरोप
एसीबी की कार्रवाई में कई अधिकारी रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़े गए, तो कुछ पर आय से अधिक संपत्ति और योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप लगे. पीसी दास (नवाडीह) को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया था, जबकि अरुण कुमार गुप्ता (जारीडीह) पर सड़क निर्माण में कमीशन मांगने का आरोप लगा. वहीं, उमाशंकर प्रसाद (चाईबासा) और दिनेश प्रसाद (हुसैनाबाद) जैसे अधिकारियों पर योजनाओं के फंड में गबन और दुरुपयोग के आरोप सामने आए.
विकास योजनाओं में अनियमितता और लापरवाही के मामले
कई बीडीओ पर मनरेगा, आवास योजना और 14वें वित्त आयोग की राशि में गड़बड़ी के आरोप लगे हैं. मृत्युंजय कुमार (पाकुड़), संजय कुमार (हजारीबाग) और प्रमोद कुमार (देवघर) जैसे अधिकारियों पर फर्जीवाड़ा, कमीशनखोरी और लाभुकों से वसूली के आरोपों के बाद कार्रवाई की गई.
अवैध खनन, जमीन घोटाले और सांठगांठ के आरोप
राजेश कुमार साह (दुमका), रवि रंजन (साहिबगंज) और संदीप कुमार (कोडरमा) जैसे अधिकारियों पर अवैध खनन को बढ़ावा देने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगे. वहीं, पंकज कुमार (रांची) और अजय कुमार (गुमला) पर जमीन से जुड़े मामलों में अनियमितता और सांठगांठ की शिकायतें सामने आईं.
ALSO READ: असम में हेमंत बनाम हिमंता: होम ग्राउंड पर सीधी चुनौती, हाई-रिस्क हाई-रिवॉर्ड की राजनीति
एसीबी के जाल में फंसे कई अधिकारी, कार्रवाई जारी
एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) की लगातार कार्रवाई में कई अधिकारी जांच के दायरे में आए हैं. राज्य में विकास योजनाओं की निगरानी करने वाले ही जब भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जा रहे हैं, तो इससे शासन-प्रशासन की छवि पर सवाल उठ रहे हैं.
