रामनवमी पर शाहपुर में सम्मान समारोह, श्रीराम सेना और पूजा समितियों के पदाधिकारी हुए सम्मानित

पलामू:शिव पार्वती सेवा समिति ट्रस्ट, शाहपुर के द्वारा रामनवमी के अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम...

पलामू:शिव पार्वती सेवा समिति ट्रस्ट, शाहपुर के द्वारा रामनवमी के अवसर पर एक भव्य सम्मान समारोह का आयोजन किया गया. यह कार्यक्रम शाहपुर के विवेकानंद चौक स्थित ट्रस्ट कार्यालय में आयोजित हुआ, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे.

इस समारोह में श्रीराम सेना के राज्य प्रमुख पंकज कुमार जायसवाल सहित शशिभूषण मिश्रा, अजीत कुमार सिंहा, संदीप कुमार दास, मनीष बर्मन, आदित्य जायसवाल और विकास चंद्रवंशी मेदिनीनगर मुख्यालय से पहुंचकर शामिल हुए. ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने सभी अतिथियों का गर्मजोशी से स्वागत किया.

ट्रस्ट के अध्यक्ष केदार शर्मा, उपाध्यक्ष जितेंद्र प्रसाद, सचिव राजेंद्र पासवान, प्रभात कुमार अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संजय जायसवाल सहित अनिल कुमार रवि, दिनेश पासवान, सोनू जायसवाल, मंटू जायसवाल, विनय जायसवाल, धीरज जायसवाल, ध्रुव जायसवाल, विनोद जायसवाल, लवलेश प्रजापति, पंकज जायसवाल, चंदन जायसवाल, मनीष जायसवाल, विकास जायसवाल और घनश्याम जायसवाल समेत अन्य सदस्यों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई.

इस दौरान श्रीराम सेना के पदाधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न रामनवमी पूजा समितियों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पगड़ी, माला और ‘श्रीराम’ नाम का अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया. सम्मानित समितियों में सत्य प्रेम संघ शाहपुर, युवा सनातन संघ शाहपुर, जीवन ज्योति संघ शाहपुर और बाल विकास संघ शाहपुर प्रमुख रूप से शामिल रहे.

वहीं, श्रीराम सेना के पदाधिकारियों ने भी ट्रस्ट के सदस्यों को शस्त्र, पगड़ी और राम नाम का अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया.

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पंकज कुमार जायसवाल ने रामनवमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व हमें प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देता है. उन्होंने कहा कि आज के समय में आवश्यकता है कि हम रामायण और प्रभु श्रीराम के जीवन मूल्यों को अपने जीवन में उतारें, जिससे समाज में आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव मजबूत हो सके.

उन्होंने आगे कहा कि रामचरितमानस की शिक्षाओं को अपनाकर समाज में बढ़ते विवाद, कलह और आपसी द्वेष को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है. भगवान श्रीराम और उनके भाई भरत के आदर्शों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि त्याग, समर्पण और मर्यादा ही एक सशक्त समाज की नींव हैं.

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