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सरकारी खर्चों का पक्का हिसाब अधूरा, कोषागार में 96.71 करोड़ के डीसी बिल लंबित

रांची: सरकारी लेखा-प्रणाली में डीसी बिल एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो सरकारी खर्चों का ‘पक्का हिसाब’ माना जाता है. लेकिन...

रांची: सरकारी लेखा-प्रणाली में डीसी बिल एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है, जो सरकारी खर्चों का ‘पक्का हिसाब’ माना जाता है. लेकिन राज्य के कोषागारों में वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के कुल 96 करोड़ 71 लाख 26 हजार 917 रुपये के डीसी बिल लंबित हैं. इसमें सबसे अधिक स्वास्थ्य विभाग का 78 करोड़ 66 लाख 89 हजार 929 रुपये लंबित है, जबकि गृह विभाग का 25 करोड़ 58 लाख 35 हजार 345 रुपये लंबित है.

क्या होता है डीसी बिल

जब कोई सरकारी विभाग किसी आपातकालीन या आकस्मिक कार्य के लिए अग्रिम राशि निकालता है, तो उसे एसी बिल कहा जाता है. इस खर्च की पूरी जानकारी जब बिल और वाउचर के साथ कोषागार में जमा की जाती है, तो उसे डीसी बिल कहा जाता है. यह सरकारी वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की सबसे अहम प्रक्रिया होती है.

क्यों जरूरी है डीसी बिल

सरकारी योजनाओं या कार्यालयों के आकस्मिक खर्चों के लिए निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी बिना बिल के अग्रिम राशि निकाल सकते हैं. लेकिन तय समय सीमा के भीतर उस खर्च का पूरा विवरण, उपयोगिता प्रमाण पत्र और रसीदों के साथ जमा करना अनिवार्य होता है.

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लंबित रहने का असर

डीसी बिल जमा नहीं होने पर वह राशि सरकारी रिकॉर्ड में ‘बकाया’ मानी जाती है. इससे वित्तीय अनियमितता का खतरा बढ़ जाता है. समय पर डीसी बिल जमा नहीं करना वित्तीय गड़बड़ी की श्रेणी में आता है और इस मुद्दे पर विधानसभा में भी सवाल उठ चुके हैं.

किस विभाग का कितना डीसी बिल लंबित

• स्वास्थ्य विभाग – 78 करोड़ 66 लाख 89 हजार 929 रुपये

• गृह विभाग – 25 करोड़ 58 लाख 35 हजार 345 रुपये

• कॉमर्शियल टैक्स – 8 लाख 39 हजार 11 रुपये

• ग्रामीण विकास – 8 लाख 6 हजार 423 रुपये

• कैबिनेट – 18 लाख रुपये

• आईटी – 56 लाख 15 हजार 400 रुपये

• डोरंडा कोषागार में हाईकोर्ट का डीसी बिल – 9 करोड़ 14 लाख 41 हजार 117 रुपये

• पर्यटन विभाग – 10 करोड़ 93 लाख 40 हजार 828 रुपये

• श्रम विभाग – 80 लाख रुपये

• निर्वाचन विभाग – 77 लाख 37 हजार 500 रुपये

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