Ranchi: भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने कहा कि SIR के मुद्दे पर झारखंड की जनता को गुमराह किया जा रहा है. साहू ने मुख्यमंत्री के उस बयान को पूरी तरह भ्रामक और आधारहीन बताया, जिसमें भाजपा पर आदिवासियों और पिछड़ों को मताधिकार, राशन और पेंशन से वंचित करने का आरोप लगाया गया था.
SIR एक नियमित चुनावी प्रक्रिया
आदित्य साहू ने स्पष्ट किया कि SIR कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की आजादी के बाद से अब तक 13 बार की जा चुकी है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब पूर्ववर्ती सरकारों के समय यह प्रक्रिया हुई, तब किसी को आपत्ति नहीं थी, तो अब मोदी सरकार के दौरान इस पर सवाल क्यों उठाए जा रहे हैं? उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह चुनाव आयोग का स्वायत्त कार्य है, जिसका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र मतदाता छूटे नहीं और कोई अपात्र या फर्जी नाम सूची में न रहे.
डेमोग्राफी में बदलाव और घुसपैठ का आरोप
भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में झारखंड की डेमोग्राफी बदली है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बेचैनी दरअसल उन घुसपैठिए वोटरों को लेकर है, जिन्हें राजनीतिक लाभ के लिए फर्जी तरीके से बसाया गया है. साहू के अनुसार, 2019 से 2024 के बीच झारखंड में मतदाता वृद्धि दर 16.7% रही, जो राष्ट्रीय औसत से कहीं अधिक है, जो अवैध घुसपैठ की पुष्टि करता है.
योजनाओं में बंदरबांट का दावा
साहू ने उदाहरण देते हुए कहा कि घाटशिला और चाकुलिया जैसे क्षेत्रों में, जहां मुस्लिम आबादी नगण्य है, वहां मंईयां सम्मान योजना और आधार कार्ड बनाने में भारी फर्जीवाड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार आदिवासियों और मूलवासियों का हक बांग्लादेशी घुसपैठियों पर लुटा रही है. SIR एक आवश्यक फिल्टर है, जिससे वास्तविक अल्पसंख्यक भी खुश हैं, क्योंकि इससे उनके हिस्से की हकमारी करने वाले रोहिंग्या और घुसपैठियों की पहचान हो सकेगी.
