Hazaribagh: शहर के जबरा तालाब स्थित ब्रांबे हाउस के समीप गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाए गए आवासों को लेकर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीबों के लिए बनाए गए इन आवासों में कई संपन्न और अपात्र लोगों के रहने की शिकायत है. लोगों ने सभी आवासों में रह रहे परिवारों का निष्पक्ष सत्यापन कराने की मांग की है.

22 भवनों में बने हैं 942 कमरे
स्थानीय लोगों के अनुसार, जबरा तालाब के समीप 22 अलग-अलग समूहों में कुल 22 भवन बनाए गए हैं. इनमें 942 कमरे हैं. आरोप है कि इन कमरों में रहने वाले परिवार वास्तव में आवास योजना के लिए पात्र हैं या नहीं, इसकी समुचित जांच नहीं हुई है. लोगों का कहना है कि कई मामलों में यह भी स्पष्ट नहीं है कि आवास किस आधार पर आवंटित किए गए. सभी निवासियों के पहचान दस्तावेज और पात्रता की जांच नियमित रूप से नहीं होने की बात भी कही जा रही है. ऐसे में वास्तविक जरूरतमंदों और अपात्र लाभुकों की पहचान के लिए व्यापक सत्यापन की जरूरत बताई जा रही है.
आर्थिक स्थिति और दस्तावेजों की हो जांच
स्थानीय लोगों का कहना है कि सभी 942 कमरों में रहने वाले परिवारों का घर-घर जाकर या संबंधित दस्तावेजों के आधार पर सत्यापन कराया जाना चाहिए. इस दौरान परिवार की आर्थिक स्थिति, पहचान, आवासहीनता और आवास आवंटन से जुड़े दस्तावेजों की जांच होनी चाहिए. लोगों के अनुसार, यदि जांच में अपात्र लोगों को योजना का लाभ मिलने की पुष्टि होती है तो यह वास्तविक जरूरतमंद परिवारों के साथ अन्याय होगा. साथ ही सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और योजना की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होंगे.
एक तरफ गरीबों को छत की तलाश, दूसरी ओर कब्जे की शिकायत
सरकार गरीब और आवासहीन परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाएं चला रही है. इन योजनाओं के तहत बड़ी राशि खर्च कर आवासों का निर्माण कराया जाता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि निगरानी और सत्यापन में कमी के कारण कई बार योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता. जबरा तालाब के समीप बने इन आवासों को लेकर भी इसी तरह की शिकायत सामने आई है. लोगों का कहना है कि एक ओर गरीब परिवार आवास की मांग को लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गरीबों के लिए बनाए गए आवासों में सक्षम लोगों के रहने की शिकायत सामने आ रही है.
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि सभी 942 कमरों में रहने वाले परिवारों का सत्यापन कर पात्र लाभुकों की सूची सार्वजनिक की जानी चाहिए. लोगों के अनुसार, यदि जांच में कोई अपात्र व्यक्ति पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए और आवास वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को उपलब्ध कराया जाना चाहिए. उनका कहना है कि सरकारी योजना का उद्देश्य तभी पूरा होगा, जब इसका लाभ उन्हीं परिवारों तक पहुंचे, जिनके लिए आवासों का निर्माण किया गया है.
AlsoRead:हजारीबाग: मातृभाषा में न्याय की मांग को लेकर हिंदी पखवाड़ा न्याय यात्रा का शुभारंभ

