युवाओं को नशे से बचाने का संकल्प: विस्थापित महाविद्यालय में विशेषज्ञों ने बताया कैसे बर्बाद हो रही नई पीढ़ी

Bokaro: विस्थापित महाविद्यालय में गुरुवार को मनोविज्ञान एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में युवाओं पर नशे के प्रभाव को लेकर संगोष्ठी...

Bokaro: विस्थापित महाविद्यालय में गुरुवार को मनोविज्ञान एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में युवाओं पर नशे के प्रभाव को लेकर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य डॉ. प्रिया कुमारी ने की, जबकि संचालन प्रो. जे. एन. राम ने किया.

विशेषज्ञों ने बताए नशे के दुष्प्रभाव

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार सिंह तथा अर्थशास्त्र के व्याख्याता डॉ. एन. एन. महतो ने पीपीटी के माध्यम से बताया कि अधिकांश बच्चे किशोरावस्था में 12 से 18 वर्ष के बीच नशे की जद में आ जाते हैं. अधिकतम 40 वर्ष की आयु तक नशे की गिरफ्त में आने की संभावना अधिक होती है. नशा शराब, तंबाकू, ड्रग्स, गांजा, भांग का हो या जुआ, गेम, मोबाइल अथवा अन्य किसी चीज का, यह मस्तिष्क के अनुमस्तिष्क एवं हिप्पोकैम्पस को बुरी तरह प्रभावित करता है. अनुमस्तिष्क शरीर को नियंत्रित करने का कार्य करता है, जबकि हिप्पोकैम्पस नई यादों को लंबे समय तक संजोकर रखने में मदद करता है, जो नशे के कारण पूरी तरह प्रभावित हो जाता है. उन्होंने कहा कि नशे के कारण मानसिक, शारीरिक और कानूनी दुष्परिणाम भी भुगतने पड़ते हैं.

नई पीढ़ी को बचाने की अपील

गोष्ठी में समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो. जगदम्ब लाल सिंह सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि भारत में हर वर्ष ड्रग्स के कारण लगभग दो लाख लोगों की मृत्यु हो जाती है. वहीं तंबाकू सेवन से होने वाली बीमारियों के कारण इलाज के दौरान या इलाज के अभाव में करीब 50 लाख लोग मौत के मुंह में समा जाते हैं. नशे के कारण केवल युवा पीढ़ी ही नहीं, बल्कि उस युवा का पूरा परिवार मानसिक, आर्थिक, पारिवारिक और सामाजिक प्रताड़ना झेलने को विवश हो जाता है. समाज एवं नई पीढ़ी को नशे से बचाने की आवश्यकता है. यह हम सभी की जिम्मेदारी है कि युवाओं को नशामुक्त रखने और बनाने के लिए हर प्रभावी कदम उठाएं.

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27 जुलाई से लगातार हो रही संगोष्ठियां

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रभारी प्राचार्य डॉ. प्रिया कुमारी ने कहा कि 27 जुलाई से महाविद्यालय में प्रतिदिन संगोष्ठी का आयोजन हो रहा है, जो 1 अगस्त तक चलेगा. हर दिन नए मुद्दों पर महाविद्यालय परिवार के सदस्य एवं छात्र-छात्राएं खुलकर अपने विचार रख रहे हैं. इससे विद्यार्थियों को नई-नई जानकारियां मिलने के साथ उनकी झिझक आत्मविश्वास में बदलने का अवसर मिल रहा है.

अन्य वक्ता भी रहे उपस्थित

कार्यक्रम में डॉ. मीना कुमारी, डॉ. नीता रानी, रश्मी रेणु बाला कुजूर, प्रो. जनार्दन प्रसाद सिंह, प्रो. नईम अंसारी, प्रो. अरविंद कुमार चौधरी सहित कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी अपने विचार रखे.

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