News Wave Desk : आधुनिक जीवनशैली में देर रात तक मोबाइल चलाना, OTT देखना, काम करना या सोशल मीडिया पर समय बिताना आम बात हो गई है. लेकिन अगर यह आदत रोज की दिनचर्या बन जाए और पर्याप्त नींद न मिले, तो इसका असर धीरे-धीरे शरीर और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, देर रात सोने के साथ लगातार कम या अनियमित नींद लेने से कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
विशेषज्ञों का कहना
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर की जैविक घड़ी (body clock) प्रभावित होती है. इससे हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है और मेटाबॉलिज्म पर भी असर पड़ता है. ऐसे लोगों में मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है. इसके अलावा, रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने से संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है. मानसिक स्वास्थ्य पर भी देर रात तक जागने का असर देखा जाता है. लगातार कम नींद लेने वाले लोगों में तनाव, चिंता, चिड़चिड़ापन और अवसाद जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. साथ ही याददाश्त, एकाग्रता और कार्यक्षमता भी प्रभावित हो सकती है.

स्वास्थ्य विशेषज्ञ का सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वयस्कों को प्रतिदिन 7 से 9 घंटे की अच्छी और नियमित नींद लेनी चाहिए. यदि किसी कारण से देर रात सोना पड़ता है, तो भी पर्याप्त नींद पूरी करना और रोजाना सोने-जागने का समय नियमित रखना जरूरी है. अच्छी नींद न केवल शरीर को ऊर्जा देती है, बल्कि लंबे समय तक स्वस्थ रहने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
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