विनीत आभा उपाध्याय
Ranchi: झारखंड हाईकोर्ट ने एक फैसले में पति के खिलाफ दर्ज क्रूरता के मामले को रद्द कर दिया है.अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पत्नी के रंग-रूप, कम IQ और बातचीत के खराब कौशल (कम्यूनिकेशन स्किल्स) को लेकर ताने मारना भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत क्रूरता का अपराध साबित करने के लिए काफी नहीं है.

क्या है मामला
यह विवाद पत्नी द्वारा दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुआ था. पत्नी का आरोप था कि शादी के बाद उसका पति उसके रंग-रूप, बौद्धिक स्तर (IQ) और बातचीत के तरीके को लेकर अक्सर ताने मारता था. उसने यह भी आरोप लगाया कि पति के दबाव के कारण उसे अलग होकर बैंगलोर और फिर कोलकाता में अपनी बहनों के पास रहने जाना पड़ा. दूसरी ओर पति ने तलाक की अर्जी दाखिल करते हुए दावा किया था कि उसने स्त्रीधन लौटा दिया है, जिसे पत्नी ने खारिज कर दिया. निचली अदालत के मजिस्ट्रेट ने पति को सभी आरोपों से मुक्त करने से इनकार कर दिया था और उसके खिलाफ आरोप तय करने का फैसला सुनाया था. इस आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता नितीश ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायत में संपत्ति या कीमती सामान की किसी गैर-कानूनी मांग का कोई उल्लेख नहीं था और ऐसा भी कोई आरोप नहीं था जिससे महिला आत्महत्या के लिए मजबूर हुई हो या उसके स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचा हो.
कोर्ट का निष्कर्ष
इस केस से जुड़े दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि केवल रंग-रूप या IQ पर टिप्पणी करना धारा 498A के तहत जानबूझकर किया गया ऐसा व्यवहार नहीं माना जा सकता जो क्रूरता के दायरे में आए. इस आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए शिकायत मामले को पूरी तरह रद्द कर दिया. इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की कोर्ट में हुई. पति की ओर से हाईकोर्ट के अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अश्विनी प्रिया ने बहस की.

