झारखंड के पूर्व IAS अधिकारियों का वह विजन, जो AI के जरिए बदल रहा देश के हर कोने की शिक्षा की तस्वीर, विकास भारती के साथ होगा MoU

Ranchi: झारखंड के कुछ चुनिंदा और दूरदर्शी पूर्व IAS अधिकारी अपनी संचित प्रशासनिक ऊर्जा को किसी कॉरपोरेट लाभ के लिए नहीं, बल्कि...

Former Chief Secretary Sudhir Tripathi
झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी

Ranchi: झारखंड के कुछ चुनिंदा और दूरदर्शी पूर्व IAS अधिकारी अपनी संचित प्रशासनिक ऊर्जा को किसी कॉरपोरेट लाभ के लिए नहीं, बल्कि देश के सुदूर गांवों के एक साधारण बच्चे को स्लेट और किताब तक पहुंचाने का संकल्प लें, तो इतिहास एक नई करवट लेता है. झारखंड के पूर्व IAS अधिकारी डॉ. शिवेंदू एस, मृदुला सिन्हा और अरुण रेड्डी ने मिलकर एक ऐसी अनोखी क्रांति का बीजारोपण किया है, जो देश की शिक्षा व्यवस्था की दशा और दिशा दोनों बदलने की कुव्वत रखती है. उनके साथ झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी का सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के तौर पर जुड़ना इस बात का प्रमाण है, कि यह केवल एक तकनीकी स्टार्टअप नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक महाअभियान है. इन्होंने मिलकर प्रेप्जी डॉट एआई (Prepzee.ai) नाम से एक ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षण ऐप तैयार किया है, जो अभाव के अंधेरे में जी रहे हर बच्चे के लिए शिक्षा का नया सूर्योदय साबित हो रहा है.

प्रशासनिक अनुभव से उपजा वह विचार, जो बदलाव की नींव बना

जब ये अधिकारी अपने सेवाकाल के दौरान झारखंड के उन दूरदराज और आदिवासी बहुल इलाकों में पहुंचे, जहां न बिजली के पुख्ता इंतजाम थे, न अच्छे स्कूल और न ही महंगे ट्यूशन की कोई गुंजाइश, तो उनके भीतर एक टीस पैदा हुई. एक IAS अधिकारी के रूप में उन्होंने देखा कि प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ सही मार्गदर्शन और संसाधनों की. रिटायरमेंट के बाद भी उनकी यह बेचैनी कम नहीं हुई. उन्होंने महसूस किया कि आज का युवा भारत यदि ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर टिकना चाहता है, तो शिक्षा के क्षेत्र से असमानता की खाई को पाटना होगा. इसी वैचारिक मंथन से जन्म हुआ प्रेप्जी डॉट एआई (Prepzee.ai) का. इन प्रशासनिक दिग्गजों का यह स्पष्ट मानना है, कि तकनीक ही वह जरिया है जो भौगोलिक दूरियों को पाटने और महानगरों तथा गांवों के बीच की खाई को पाटने का सबसे बड़ा हथियार बन सकती है.

क्या है प्रेप्जी डॉट एआई और यह कैसे काम करता है?

व्यापक पाठ्यक्रम: इस ऐप के जरिए सीबीएसई बोर्ड (CBSE Board) की कक्षा 6 से 12वीं तक के सभी संकायों (साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स) के विद्यार्थियों को प्रत्येक विषय के सभी अध्याय, विस्तृत वीडियो ट्यूटोरियल और क्विज की सुविधा एक ही जगह मिल जाती है.

वन-टू-वन एआई मार्गदर्शन: इसकी सबसे खास विशेषता यह है कि यह छात्रों को व्यक्तिगत स्तर पर संभालता है. बच्चा पढ़ाई के दौरान कभी भी, कोई भी शंका पूछ सकता है और उसे पलक झपकते ही सटीक जवाब मिल जाता है.

त्रुटि सुधार: यह ऐप केवल उत्तर नहीं बताता.यदि छात्र का कोई उत्तर गलत होता है, तो एआई यह भी विश्लेषण करता है कि छात्र से गलती कहां हुई, उसकी वैचारिक समझ में कहां चूक थी और सही उत्तर तक तार्किक रूप से कैसे पहुंचा जाए.

स्वयं का आकलन: प्रत्येक विषय के लिए विशेष क्विज डिजाइन किए गए हैं, जिससे विद्यार्थी अपनी तैयारी का खुद आकलन कर सकें और अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन्हें समय रहते दूर कर सकें.

अमेरिका से चंडीगढ़ और दिल्ली तक सफर

इस नवाचारी ऐप का संचालन वैश्विक मानकों के अनुरूप US से किया जा रहा है, जबकि भारत में इसका मुख्य संचालन चंडीगढ़ से हो रहा है. तकनीक भले ही वैश्विक हो, लेकिन इसका दिल पूरी तरह से भारतीय संवेदनाओं के साथ धड़क रहा है. फिलहाल, यह ऐप दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों के साथ भी सफलतापूर्वक काम कर रहा है, जहां के विद्यार्थियों ने इसकी उपयोगिता को गहराई से समझा है. शुरुआती स्तर पर विद्यार्थी सीमित संख्या में सवाल बिल्कुल नि:शुल्क पूछ सकते हैं, ताकि वे इसकी उपयोगिता से रूबरू हो सकें. इसके बाद, अनलिमिटेड सवालों और सभी प्रीमियम सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए मात्र सात से 11 रुपये प्रतिदिन का बेहद मामूली सब्सक्रिप्शन रखा गया है, ताकि यह हर मध्यम और सामान्य परिवार की पहुंच में हो. इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से आसानी से डाउनलोड किया जा सकता है.

विकास भारती के साथ ऐतिहासिक MoU

इस महाअभियान का दायरा अब और व्यापक होने जा रहा है. कंपनी विकास भारती के साथ एक अत्यंत महत्वपूर्ण MoU (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर करने जा रही है. इस MoU के तहत झारखंड के अत्यंत पिछड़े, उग्रवाद प्रभावित और दुर्गम दूरस्थ क्षेत्रों के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चों तक इस तकनीक के जरिए उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने का रोडमैप तैयार किया गया है. उन बच्चों को डिजिटल माध्यम से ऐसी शिक्षण सामग्री और एआई ट्यूटर उपलब्ध कराया जाएगा, जिन्हें कभी अच्छे शिक्षकों, महंगे स्कूलों या कोचिंग संस्थानों की सुविधा का सुख नहीं मिल पाया. यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े सामाजिक समता आंदोलन की तरह है.

जब तक जरूरत, तब तक मिशन अधूरा

प्रेप्जी के संस्थापक डॉ. शिवेंदू एस और मृदुला सिन्हा का लक्ष्य भारत के हर बच्चे को उसकी व्यक्तिगत क्षमता और स्तर के अनुसार वन-टू-वन लर्निंग उपलब्ध कराना है. उनका विश्वास है कि इस देश में कोई भी बच्चा केवल संसाधनों के अभाव या गरीबी के कारण अपनी पढ़ाई में पीछे नहीं छूटना चाहिए. कंपनी के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी ने इस मिशन के मूल भाव को बेहद मार्मिक तरीके से परिभाषित किया है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि हमारा सपना एक ऐसी आदर्श शिक्षा व्यवस्था विकसित करना है, जहां हर बच्चे को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिले. यदि भविष्य में हमारे इस ऐप के बावजूद किसी बच्चे को अलग से ट्यूशन की जरूरत पड़ गई, तो हम यह मानेंगे कि हमारा यह मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है.

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