झारखंड के ये ‘कर्मयोगी’ आइएएस बने मिसाल: प्रशासनिक दक्षता और नवाचार से लिख रहे हैं विकास की नई इबारत

Ranchi: कहते हैं कि एक कुशल प्रशासक वही है जो फाइलों के बोझ से इतर ज़मीनी हकीकत को बदले. झारखंड कैडर के...

Ranchi: कहते हैं कि एक कुशल प्रशासक वही है जो फाइलों के बोझ से इतर ज़मीनी हकीकत को बदले. झारखंड कैडर के कई आईएएस अधिकारियों ने अपनी कार्यशैली, ईमानदारी और नवाचार से न केवल प्रशासन की छवि बदली है, बल्कि वे आज प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं. नीति निर्माण से लेकर उसे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के सफर में इन ‘सिविल सेवा के सिपाही’ का योगदान अतुलनीय है. झारखंड के प्रशासनिक गलियारों में ऐसे कई नाम हैं जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी विकास का रास्ता निकाला है.

ये भी पढ़ें : हजारीबाग घटना पर BJP का ऐलान, 3 अप्रैल को झारखंड बंद

अविनाश कुमारः नेतृत्व और नवाचार की अनूठी मिसाल

वर्तमान में राज्य के मुख्य सचिव के रूप में, अविनाश कुमार अपनी निर्णय लेने की क्षमता और विभागों के बीच समन्वय के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने ‘सिटिजन-सेंट्रिक’ यानी नागरिक-केंद्रित शासन पर विशेष जोर दिया है, जिससे सरकारी योजनाओं का लाभ सीधा जनता तक पहुंच रहा है.

सुनील वर्णवाल: तकनीक और पारदर्शिता के पुरोधा

1997 बैच के आईएएस अधिकारी सुनील वर्णवाल को झारखंड में ‘तकनीकी सुधारों का चेहरा’ माना जाता है. मुख्यमंत्री के सचिव के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान ‘जनसंवाद’ जैसे कार्यक्रम ने शासन और जनता के बीच की दूरी को कम किया. उन्होंने यह सिखाया कि कैसे डेटा और तकनीक का उपयोग करके भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है और अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाई जा सकती है. वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर उनकी भूमिकाएं उनकी प्रशासनिक कुशलता का लोहा मनवाती हैं.

निधि खरे: उपभोक्ता अधिकारों की सजग प्रहरी

1992 बैच की आईएएस अधिकारी निधि खरे झारखंड की उन महिला अधिकारियों में शुमार हैं, जिन्होंने अपनी निर्भीकता से एक अलग पहचान बनाई. केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की प्रमुख और वर्तमान में उपभोक्ता मामलों की सचिव के रूप में, उन्होंने भ्रामक विज्ञापनों और उपभोक्ता अधिकारों के हनन के खिलाफ कड़े कदम उठाए. झारखंड में कैडर में रहते हुए भी उनकी छवि एक सख्त और न्यायप्रिय प्रशासक की रही. उनकी यात्रा महिला सशक्तीकरण का जीवंत उदाहरण है, जो सिखाती है कि नेतृत्व केवल सत्ता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और निडरता का नाम है.

ये भी पढ़ें : भाकपा का वार : बच्ची से दरिंदगी मामले में भाकपा ने राज्य सरकार को घेरा, सीएम हेमंत सोरेन से कार्रवाई की मांग

अजय सिंह: सौम्यता और कुशल प्रबंधन का संगम

वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अजय सिंह अपनी सादगी और जटिल प्रशासनिक गुत्थियों को सहजता से सुलझाने के लिए पहचाने जाते हैं. विभिन्न विभागों के सचिव और महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए अजय सिंह ने नीतिगत स्थिरता पर जोर दिया. वे जमीन से जुड़े रहकर काम करने वाले अधिकारी माने जाते हैं. उनका व्यक्तित्व सिखाता है कि बिना किसी शोर-शराबे के, अनुशासन और धैर्य के साथ कैसे बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं.

सुशांत गौरव (पीएम अवार्ड विजेता)

2014 बैच के अधिकारी सुशांत गौरव ने गुमला जिले की तस्वीर बदल दी. उन्होंने रागी (मड़ुआ) की खेती को बढ़ावा देकर गुमला को ‘रागी कैपिटल’ बनाया और कुपोषण के खिलाफ जंग छेड़ी. उनके इसी नवाचार के लिए उन्हें ‘प्रधानमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार’ से नवाजा गया.

आदित्य रंजन

शिक्षा और आंगनबाड़ी केंद्रों के कायाकल्प के लिए आदित्य रंजन का नाम बड़े सम्मान से लिया जाता है. चाईबासा और अन्य क्षेत्रों में ‘मॉडल आंगनबाड़ी’ और शिक्षा में तकनीकी सुधारों के जरिए उन्होंने सरकारी स्कूलों के प्रति समाज का नजरिया बदल दिया.

अबू इमरान 

प्रशासनिक दक्षता और त्वरित कार्रवाई के लिए जाने जाने वाले कई अन्य अधिकारी जैसे अबू इमरान, जो पेयजल और स्वच्छता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं, राज्य के विकास में रीढ़ की हड्डी की तरह कार्य कर रहे हैं.

सम्बंधित ख़बरें

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *