Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को झारखंड मंत्रालय में श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा योजना एवं विकास विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा को लेकर अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की. मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने, कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आधुनिक बनाने, सभी पात्र श्रमिकों को कल्याणकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने पर जोर दिया. उन्होंने राज्य के युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाने का निर्देश दिया. साथ ही प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए विशेष पहल करने की बात कही. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस राज्य में श्रम विभाग की बहुत बड़ी भूमिका है. आपके बेहतर कार्य प्रणाली से ही श्रमिकों का उत्थान किया जा सकेगा. श्रमिकों की सुरक्षा आपके कार्यों और योजनाओं पर निर्भर है. विभाग श्रमिकों तक अपनी पहुंच बनाए. देश के सभी राज्यों में श्रमिकों के लिए एक हेल्पलाइन सेंटर स्थापित करें.

श्रमिकों को योजनाओं से जोड़ने का निर्देश
मुख्यमंत्री ने असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों का ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण, सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ तथा श्रमिक कल्याण कार्यक्रमों की प्रगति पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि श्रमिकों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ें और योजना का लाभ समय-सीमा के अंतर्गत देना सुनिश्चित करें. राज्य में असंगठित, निर्माण एवं प्रवासी श्रमिकों का अपडेटेड डाटा शीघ्र तैयार करने का निर्देश अधिकारियों को दिया. मुख्यमंत्री ने अगले 3 माह के भीतर देश के किस राज्य में हमारे कितने श्रमिक क्या काम कर रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी पोर्टल में रहे, यह सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए.
प्रवासी सहायता केंद्र होंगे स्थापित
बैठक में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि ‘झारखंड राज्य प्रवासी सुलभ सहायता योजना’ के तहत झारखंड राज्य के प्रवासी एवं विदेश में कार्यरत श्रमिकों के लिए नोएडा, हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु एवं मुंबई में प्रवासी सहायता केंद्र स्थापित किए जाएंगे. इसके अलावा सीमावर्ती राज्यों में भी प्रवासी श्रमिकों को सहायता प्रदान की जाएगी.
निबंधन अभियान में लाने को कहा तेजी
मुख्यमंत्री ने श्रमिक निबंधन कार्यों में तेजी लाने का भी निर्देश दिया. श्रमिक की सुरक्षा, ट्रैकिंग आदि विभाग की जिम्मेदारी है. श्रम विभाग कैंप लगाकर श्रमिकों का पोर्टल के माध्यम से निबंधन कराएं, ताकि उनके साथ कोई समस्या होने पर राज्य सरकार उनकी त्वरित मदद कर सके. उन्होंने कहा कि मनरेगा योजना के श्रमिकों का भी निबंधन हो, यह सुनिश्चित किया जाए.
सेफ्टी किट और सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के लिए सेफ्टी किट, जूता, हेलमेट, ग्लव्स इत्यादि की राशि प्रदान करने का निर्देश दिया. श्रमिकों का सेफ्टी किट के लिए दुकान चिन्हित कराते हुए सभी उपकरण उपलब्ध करवाना सुनिश्चित कराएं, ताकि श्रमिकों को आसानी से किट की सामग्री मिले. श्रमिकों के लिए ड्रेस कोड हो, यह सुनिश्चित किया जाए. दुर्घटनाओं को रोकने के सभी जरूरी उपाय किए जाएं. कंस्ट्रक्शन साइट्स पर श्रमिकों की सुरक्षा से संबंधित सभी जरूरतों को अंकित करने हेतु बोर्ड लगवाना अनिवार्य करें.
श्रमिक आधारित राज्य की पहचान बदलने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि विभाग कुछ ऐसी कार्य योजना बनाए, जिससे मजदूरों को आत्मनिर्भर बनाया जा सके. झारखंड को श्रमिक आधारित राज्य के रूप में बताया जाता है. इससे बाहर निकलने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जरूरतें बदल चुकी हैं. विभाग कुछ ऐसी नीति बनाए, जिससे श्रमिक अपने पैरों पर खड़े (आत्मनिर्भर) हो सकें. मुख्यमंत्री ने कहा कि रोजी-रोजगार के लिए श्रमिक गांव छोड़ने को भी मजबूर हो रहे हैं. यह पलायन हर हाल में रुके, इस लक्ष्य के साथ कार्यों को गति दें. उन्होंने कहा कि विभाग एक बेहतर मैकेनिज्म विकसित कर मजदूरों का सत्यापन कराए.
श्रमिक चौक-सह-सुविधा केंद्र बनाने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग की टीम श्रमिक प्वाइंट चिन्हित करे (वैसे चौक-चौराहे जहां काम के लिए श्रमिक एकत्र होते हैं). इन श्रमिक प्वाइंट पर जाकर उनके कल्याण हेतु सरकार की योजनाओं की जानकारी दें. उन्हें जागरूक करें. चिन्हित श्रमिक पड़ाव स्थान पर शेड बनाएं, ताकि मजदूरों को धूप व बरसात से बचाव हो सके. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि बीओसीडब्ल्यू बोर्ड की कार्य योजना के तहत श्रमिक पड़ावों को श्रमिक चौक-सह-सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की योजना है, जहां सभी आवश्यक बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.
प्रवासी मजदूरों की मैपिंग का निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रवासी मजदूरों की मैपिंग कर उनका लोकेशन पोर्टल में दर्ज करें. हमारे कितने मजदूर देश के बाहर या अन्य राज्यों में कार्य कर रहे हैं, इसका पूरा डाटा रखें. श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग अपनी योजनाओं का विभिन्न संबंधित विभागों से समन्वय बनाकर मूल्यांकन करें.
ITI को अपग्रेड करने पर जोर
राज्य के अंदर स्थापित औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों एवं अन्य प्रशिक्षण संस्थानों को अपग्रेड करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि औद्योगिक संस्थानों की डिमांड एवं भविष्य की आवश्यकताओं को दृष्टिगत रखते हुए प्रशिक्षण कोर्स डिजाइन किए जाएं. प्रत्येक जिले के एक आईटीआई को मॉडल आईटीआई के रूप में विकसित करें. इसकी ग्रेडिंग भी कराएं और हाई वैल्यू कृषि कोर्स को भी चालू कराएं. सभी कौशल प्रशिक्षण केंद्रों में अत्याधुनिक मशीनें, प्रयोगशालाएं (लैब्स) एवं स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना की जाए.
युवाओं के प्लेसमेंट पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आईटीआई के विद्यार्थियों को डिग्री लेकर भटकना नहीं पड़े. इसके लिए प्लेसमेंट की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि इम्प्लॉयमेंट चेन विकसित करें, ताकि यहां के प्रशिक्षण प्राप्त विद्यार्थियों को आसानी से प्लेसमेंट हो सके. उन्होंने बड़ी कंपनियों के फैकल्टी को हायर कर आईटीआई के अध्ययनरत विद्यार्थियों को शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान कराने का भी निर्देश दिया. निजी संस्थानों से जो लोग सेवानिवृत्त हो गए हैं, उनके अनुभवों का लाभ विद्यार्थियों को मिले, इसकी रूपरेखा भी तैयार करें.
प्रशिक्षित युवाओं से की बातचीत
मुख्यमंत्री ने आईटीआई धनबाद से शिक्षा ग्रहण कर जबलपुर स्थित एक बड़े उद्योग में कार्यरत सूरज कुमार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत कर उनका कुशलक्षेम और उनकी वहां की कार्यप्रणाली की जानकारी ली. सूरज कुमार ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि 9 वर्ष पूर्व उन्होंने आईटीआई धनबाद से शिक्षा ग्रहण की थी. वर्तमान में वे जबलपुर में करीब 70 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय पर कार्य कर रहे हैं. अपने कार्य व मानदेय से संतुष्ट हैं. उन्होंने बताया कि वहां उनके अलावा झारखंड राज्य के तीन और लोग भी कार्यरत हैं.
अनिमा कुमारी ने साझा किया अनुभव
मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही पुणे स्थित एक संस्थान में कार्यरत अनिमा कुमारी से भी बातचीत कर कुशलक्षेम जाना. अनिमा ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि लोहरदगा स्थित मोज़ेक स्किल ट्रेनिंग सेंटर से प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरांत वे पुणे स्थित एक संस्थान में सेवा दे रही हैं. अनिमा ने बताया कि सेवा कार्य के एवज में उन्हें मई माह में 21 हजार रुपये मानदेय मिला है. उन्होंने जानकारी दी कि झारखंड से प्रशिक्षण प्राप्त 10 अन्य लड़कियां पुणे के विभिन्न संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रही हैं, जो उनके सीधे संपर्क में भी हैं. मुख्यमंत्री ने अनिमा के आवासन, खाने की व्यवस्था, सुरक्षा आदि के बारे में भी जानकारी प्राप्त की. अनिमा ने उत्साह व आत्मविश्वास के साथ मुख्यमंत्री के प्रति आभार एवं धन्यवाद ज्ञापित किया.
