West Asia crisis: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने अब नया मोड़ ले लिया है. ईरान के दो बड़े हमलों ने न सिर्फ क्षेत्रीय संतुलन बिगाड़ा है, बल्कि अमेरिका की रणनीति को भी हिला दिया है. कतर के गैस प्लांट पर हमला और हिंद महासागर में डिएगो गार्सिया जैसे सुरक्षित सैन्य ठिकाने को निशाना बनाने की कोशिश ने ट्रंप को कहीं न कहीं एक झटका जरूर दे दिया है. यह दोनों इतने बड़े कारण हैं कि ट्रंप को अब युद्ध खत्म करने की बातें कहनी पड़ रही है. ट्रंप को पहला बड़ा झटका तब लगा जब ईरान ने कतर के रास लाफान गैस हब पर मिसाइल हमला किया. यह दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी उत्पादन केंद्रों में से एक है और वैश्विक गैस सप्लाई का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है. इस हमले से उत्पादन क्षमता करीब 17 प्रतिशत तक घट गई और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ. इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार भी हिल गया.

ईरानी हमले से अमेरिका हुआ प्रभावित
कतर के गैस प्लांट में अमेरिकी कंपनियां शामिल, इसलिए अमेरिका को सीधा आर्थिक नुकसान पहुंचा. एलएनजी उत्पादन घटने से वैश्विक गैस सप्लाई प्रभावित हुई. हमले के बाद गैस और ऊर्जा कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई. वहीं यूरोप और एशिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है. भारत समेत कई देशों पर भी असर पड़ा, जिससे वैश्विक दबाव बढ़ा है. अमेरिका की ऊर्जा और आर्थिक रणनीति पर असर पड़ा. सहयोगी देशों में भी इसे लेकर नाराजगी बढ़ सकती है. अमेरिका पर युद्ध जल्द खत्म करने का दबाव बढ़ गया है.
अमेरिका को लेकर खाड़ी देशों में बढ़ सकती है नाराजगी
खाड़ी देशों में असंतोष बढ़ने की आशंका इसलिए मजबूत हो गई क्योंकि लंबे समय से ये देश अमेरिका को अपनी सुरक्षा का सबसे बड़ा भरोसेमंद साथी मानते रहे हैं. सऊदी अरब, कतर, यूएई और कुवैत जैसे देशों ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को अपने यहां जगह दी, अरबों डॉलर के रक्षा समझौते किए और क्षेत्रीय रणनीति में अमेरिका के साथ खड़े रहे. बदले में उन्हें यह उम्मीद थी कि किसी भी बड़े खतरे की स्थिति में अमेरिका उनकी सुरक्षा की गारंटी देगा. लेकिन हालिया घटनाक्रम ने इस भरोसे को झटका दिया. जब इस्राइल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए, तो निशाना वही खाड़ी देश बने जो अमेरिका के करीबी सहयोगी हैं. कतर के गैस प्लांट पर हमला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इससे इन देशों में यह भावना मजबूत हुई कि वे एक ऐसे संघर्ष में घसीटे जा रहे हैं, जिसका फैसला उन्होंने खुद नहीं लिया.
अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर गंभीर सवाल
इस स्थिति ने अमेरिका की सुरक्षा गारंटी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. खाड़ी देशों को अब यह डर सताने लगा है कि कहीं वे बड़े शक्ति संघर्ष में मोहरा न बन जाएं. अगर युद्ध लंबा खिंचता, तो यह असंतोष खुलकर सामने आ सकता था और अमेरिका के साथ उनके रिश्तों में दरार भी पड़ सकती थी.
डिएगो गार्सिया तक पहुंचना ईरान की बड़ी सफलता
डिएगो गार्सिया तक पहुंच बनाना ईरान के लिए सिर्फ एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि बड़ा रणनीतिक संदेश माना जा रहा है. यह ठिकाना अमेरिका और ब्रिटेन का बेहद अहम सैन्य बेस है, जो हिंद महासागर के बीचों-बीच स्थित है और इसे लंबे समय से सुरक्षित माना जाता रहा है. यहां से अमेरिका अपने लंबी दूरी के बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और अत्याधुनिक सैन्य संसाधनों का संचालन करता है, जिससे एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में तेजी से कार्रवाई की जा सकती है.

