खौफ के साये में गवाह: न्याय की राह में सफेदपोश और अपराधियों का पहरा

  रांची: झारखंड में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए...

 

रांची: झारखंड में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि अब वे कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए सीधे न्याय की प्रक्रिया पर प्रहार कर रहे हैं. राज्य के विभिन्न जिलों से पिछले कुछ वर्षों में ऐसी कई डरावनी तस्वीरें सामने आई हैं, जहां किसी संगीन अपराध के चश्मदीद गवाहों को अपनी जान गंवानी पड़ी. गवाहों की सरेआम हत्या ने न केवल पुलिसिया सुरक्षा पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि आम आदमी के मन में ‘गवाही’ देने के प्रति डर भर दिया है.

सिलसिलेवार वारदातों ने चौंकाया:

  • 03 अप्रैल 2026: पलामू में शताब्दी मार्केट के पास गुड्डू खलीफा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. वह 2012 के झामुमो नेता हत्याकांड का मुख्य गवाह था.
  • 02 फरवरी 2025: चतरा जिला अंतर्गत टंडवा में विष्णु साव नामक जिस शख्स की हत्या नक्सलियों ने कर दी, वह टेरर फंडिंग के केस में एनआईए का गवाह था.
  • 05 जुलाई 2023: रांची के सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में बिल्डर कमल भूषण मर्डर केस के गवाह संजय कुमार की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.
  • जून 2022: जमशेदपुर के सिदगोड़ा में घर में घुसकर मनप्रीत सिंह नामक युवक की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई थी. इस घटना के बाद झारखंड हाई कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा को लेकर स्वत: संज्ञान लिया और सरकार से जवाब मांगा था.यह मामला रंजिश में गवाह की हत्या से जुड़ा था.
  • 21 सितंबर 2021: राजधानी में सुबोध तिवारी हत्याकांड के चश्मदीद गवाह को ठिकाने लगाने के लिए किया. गवाह रवींद्र नंद तिवारी को पिकअप वैन से कुचल कर मार डाला था.

 

राज्य में गवाहों को निशाना बनाने का पैटर्न काफी पुराना है:

राज्य में गवाहों को निशाना बनाने का पैटर्न काफी पुराना है, लेकिन हाल के वर्षों में इसमें तेजी आई है, चाहे वह जमीन विवाद से जुड़े मामले हों, उग्रवादी घटनाएं हों या फिर राजनीतिक हत्याएं, अपराधियों का पहला मकसद मुख्य गवाह को रास्ते से हटाना होता है. कई मामलों में देखा गया है कि गवाहों को कोर्ट पहुंचने से पहले या गवाही देकर निकलते वक्त निशाना बनाया गया.

 

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