झारखंड में 120 खनन पट्टे फेल, महज 89 लीज पर चल रहा कामकाज, दुमका में एक भी खदान चालू हालत में नहीं

Ranchi: झारखंड में खनन के 212 लीज स्वीकृत हैं. इसमें से 120 खनन पट्टे फेल हो गए हैं. सिर्फ 89 लीज पर...

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Ranchi: झारखंड में खनन के 212 लीज स्वीकृत हैं. इसमें से 120 खनन पट्टे फेल हो गए हैं. सिर्फ 89 लीज पर काम चल रहा है. कई जिलों में स्वीकृत लीज का आधा हिस्सा या तो ठप पड़ा है या अस्थाई रूप से बंद की श्रेणी में दम तोड़ रहा है.

धनबाद सर्किल: आधे से ज्यादा लीज पड़े हैं ठप

कोयलांचल के रूप में दुनिया भर में मशहूर धनबाद और इसके आसपास का क्षेत्र हमेशा से औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र रहा है, लेकिन आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं. इस सर्किल के तहत आने वाले बोकारो, धनबाद और गिरिडीह जिलों में कुल मिलाकर 133 लीज स्वीकृत हैं. इसमें से मात्र 62 लीज ही सक्रिय रूप से काम कर रही है. 52 लीज ऐसी हैं जो अस्थायी रूप से बंद पड़ी हैं, जबकि 19 लीज लैप्स हो चुकी हैं.

धनबाद सर्किल का जिलावार आकंड़ा

धनबाद: यहां कुल 105 लीज में से केवल 51 कार्यरत हैं, जबकि 49 लीज अस्थायी रूप से बंद हैं. 5 लीज लैप्स हो चुकी हैं.

बोकारो: यहां कुल 26 लीज में से 10 काम कर रही हैं, 3 अस्थायी रूप से बंद हैं और 13 लीज लैप्स हो चुकी हैं यानी आधे से ज्यादा लीज का अस्तित्व खत्म हो चुका है.

गिरिडीह: यहां मात्र 2 लीज थीं, जिनमें से 1 चालू है और 1 लैप्स हो चुकी है.

दुमका सर्किल: संताल परगना में खनन क्षेत्र बदहाल, ज्यादातर जिलों में सन्नाटा

संताल परगना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दुमका सर्किल में खनन कारोबार की रफ्तार बेहद सुस्त और चिंताजनक है. यहां कई जिलों में तो एक भी लीज काम नहीं कर रही है. इस सर्किल के छह जिलों में कुल 20 लीज का आंकड़ा दर्ज है. कुल मिलाकर केवल 3 लीज ही धरातल पर काम कर रही हैं. यहां 1 लीज अस्थायी रूप से बंद है और 16 लीज लैप्स की भेंट चढ़ चुकी हैं.

दुमका सर्किल का जिलावार आकंड़ा

देवघर: यहां 1 लीज थी जो वर्तमान में कार्यरत है.

दुमका: कुल 3 लीज में से 1 अस्थायी रूप से बंद है और 2 लैप्स हो चुकी हैं. यानी यहां एक भी खदान चालू हालत में नहीं है.

गोड्डा: यहां 11 लीज में से सिर्फ 2 काम कर रही हैं और 9 लैप्स हो चुकी हैं.

जामताड़ा: यहां कुल 5 लीज थीं और सभी की सभी 5 लैप्स हो चुकी हैं.

पाकुड़: पाकुड़ स्टोन चिप्स के लिए जाना जाता है, जहां 3 लीज में से 2 कार्यरत हैं और 1 लैप्स हुई है.

साहेबगंज: इस जिले में खनन लीज का खाता तक शून्य है, यहां कुल 0 लीज दर्ज हैं.

हजारीबाग सर्किल: कोयलांचल के इस गढ़ में भी लग रहे हैं ताले

औद्योगिक और खनिज दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हजारीबाग सर्किल में भी खनन पट्टों की स्थिति संतोषजनक नहीं है. इस सर्किल के चार जिलों में कुल 49 लीज स्वीकृत हैं. इनमें से 19 लीज सुचारू रूप से काम कर रही हैं. कुल 9 लीज अस्थायी रूप से बंद हैं और 11 लीज लैप्स हो चुकी हैं.

हजारीबाग सर्किल का जिलावार आंकड़ा

चतरा: यहां कुल 5 लीज हैं, जिनमें से 4 कार्यरत हैं और 1 अस्थायी रूप से बंद है.

हजारीबाग: इस प्रमुख जिले में कुल 19 लीज में से 13 काम कर रही हैं, 1 अस्थायी रूप से बंद है और 5 लैप्स हो चुकी हैं.

कोडरमा: यहां भी खनन पट्टों की संख्या 0 है.

रामगढ़: रामगढ़ जैसे घने औद्योगिक क्षेत्र में कुल 25 लीज में से केवल 12 काम कर रही हैं, जबकि 7 अस्थायी रूप से बंद हैं और 6 लैप्स हो चुकी हैं.

कोल्हान सर्किल: प्रमंडल में सन्नाटा, धरातल पर खनन गतिविधियों का अता-पता नहीं

खनिज संपदा का यह गढ़ प्रशासनिक कागजों पर लगभग खाली नजर आ रहा है. इस सर्किल के तीन प्रमुख जिलों चाईबासा, जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां में कुल मिलाकर मात्र 1 लीज का रिकॉर्ड है. एक मात्र लीज (जो जमशेदपुर में थी) को भी लैप्स घोषित किया जा चुका है. चाईबासा और सरायकेला-खरसावां में कुल लीज की संख्या 0 दर्ज है.

पलामू सर्किल: गिने-चुने खनन पट्टों का ही सहारा

राज्य के पश्चिमी हिस्से में स्थित पलामू प्रमंडल में खनन गतिविधियों का दायरा पहले से ही सीमित है और जो थोड़ी-बहुत लीज हैं, उनकी स्थिति भी बहुत उत्साहजनक नहीं है. पलामू सर्किल के तीन जिलों में कुल 9 लीज का रिकॉर्ड दर्ज है. इनमें से 6 लीज वर्तमान में धरातल पर काम कर रही हैं. यहां कोई भी लीज अस्थायी रूप से बंद नहीं है, लेकिन 3 लीज लैप्स हो चुकी हैं.

पलामू सर्किल का जिलावार आंकड़ा

गढ़वा: यहां कुल लीज की संख्या 0 है.

लातेहार: कुल 5 लीज में से 3 कार्यरत हैं और 2 लैप्स हो चुकी हैं.

पलामू: कुल 4 लीज में से 3 काम कर रही हैं और 1 लैप्स हुई है.

रांची सर्किल: खनन पट्टों का हाल बेहाल

राजधानी रांची और इसके आसपास के जिलों में प्रशासनिक धमक होने के बावजूद खनन क्षेत्र का हाल बेहाल है. रांची सर्किल के पांच जिलों में कुल 11 लीज दर्ज हैं. इसमें से केवल 4 लीज ही सक्रिय रूप से काम कर रही हैं. 7 लीज सीधे तौर पर लैप्स हो चुकी हैं.

रांची सर्किल का जिलावार आंकड़ा

गुमला, खूंटी, लोहरदगा और सिमडेगा: इन चारों जिलों में खनन लीज का आंकड़ा 0 है. केवल रांची जिले में कुल 11 लीज थीं, जिसमें से 4 काम कर रही हैं और 7 लीज लैप्स हो चुकी हैं.

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