हजारीबाग: रोजगार की तलाश में मुंबई गये प्रवासी मजदूर की हुई मौत, तीन दिन बाद गांव पहुंचा शव

Hazaribagh: परिवार की आजीविका और बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में मुंबई में टैक्सी चलाकर जीवन-यापन कर रहे विष्णुगढ़ प्रखंड के...

Hazaribagh: परिवार की आजीविका और बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीद में मुंबई में टैक्सी चलाकर जीवन-यापन कर रहे विष्णुगढ़ प्रखंड के बरांय पंचायत निवासी गुलचंद पासवान (56) की अचानक मौत हो गई. बुधवार को करीब तीन दिन बाद उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो पूरे बरांय में मातम पसर गया. परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो उठा. बताया गया कि गुलचंद पासवान, पिता स्वर्गीय बंधु पासवान, पिछले कई वर्षों से मुंबई में रहकर टैक्सी चलाते थे. इसी से होने वाली आय से वह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे. सोमवार की सुबह वह अपनी टैक्सी लेकर काम के लिए निकले थे. कुछ दूरी पर वह शौचालय गए, लेकिन काफी देर तक बाहर नहीं निकले. लोगों को संदेह होने पर खोजबीन की गई तो वह शौचालय के अंदर मृत अवस्था में मिले. घटना की सूचना मिलने के बाद मुंबई में रहने वाले झारखंड के प्रवासी मजदूरों एवं स्थानीय मित्रों ने सहयोग किया. शव को मुंबई के केईएम अस्पताल ले जाकर आवश्यक चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी कराई गई. इसके बाद सहयोग से पार्थिव शरीर को गांव लाने की व्यवस्था की गई. बुधवार को शव बरांय पहुंचते ही परिवार और ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गई.

कमाने वाले सदस्य के जाने से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

गुलचंद पासवान अपने पीछे पत्नी सरिता देवी, चार बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं. परिवार के लिए वह प्रमुख कमाऊ सदस्य थे. अचानक उनके निधन से परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ-साथ भविष्य की चिंता भी खड़ी हो गई है. पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही परिजन फूट-फूटकर रोने लगे. ग्रामीणों ने भी शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े रहने का भरोसा दिलाया.

शेख तैयब ने जताया दुख, स्थानीय रोजगार सृजन की उठाई मांग

शव गांव पहुंचने की सूचना पर विष्णुगढ़ मध्य जिला परिषद सदस्य शेख तैयब बरांय पहुंचे और शोक संतप्त परिवार से मिलकर संवेदना व्यक्त की. उन्होंने गुलचंद पासवान की मौत को अत्यंत दुखद बताते हुए कहा कि प्रवासी मजदूरों की असमय मौत की खबर बेहद पीड़ादायक होती है. उन्होंने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों का रुख करने को मजबूर हैं. सरकार को स्थानीय स्तर पर व्यापक रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए ठोस एवं प्रभावी नीति बनानी चाहिए, ताकि मजदूरों को अपने परिवार से दूर जाकर रोजी-रोटी के लिए संघर्ष न करना पड़े.

ग्रामीणों ने परिवार को हरसंभव सहयोग का दिया भरोसा

शोक व्यक्त करने वालों में पंचायत के मुखिया राजेंद्र मंडल, भाकपा माले प्रखंड सचिव घनश्याम पाठक, जानकी शर्मा, रामेश्वर दास, मनोज मंडल, किशुन साव, जयचंद दास समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे. लोगों ने परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में पूरा गांव परिवार के साथ है. मौके पर मौजूद लोगों ने संबंधित प्रावधानों के तहत प्रवासी मजदूर के परिवार को मिलने वाले सरकारी एवं कल्याणकारी लाभ उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पहल करने की बात कही. गुलचंद पासवान की मौत ने एक बार फिर प्रवासी मजदूरों की मजबूरी और रोजगार के लिए अपने घर-परिवार से दूर रहने की पीड़ा को सामने ला दिया है. बुधवार को गांव पहुंचा उनका पार्थिव शरीर परिवार के लिए ऐसा गहरा सदमा छोड़ गया, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी.

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