चतरा: प्रकृति का महापर्व सरहुल इस वर्ष पूरे उल्लास, श्रद्धा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ धूमधाम से मनाया गया . पर्व को लेकर सरना समितियों द्वारा व्यापक तैयारियां की गई थीं, जिससे पूरे जिले में उत्सव का माहौल देखने को मिला .

पकरिया सरना स्थल पर विधि-विधान से पूजा
जिला मुख्यालय स्थित पकरिया के टोंगरी सरना स्थल पर आदिवासी केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की गई . पूजा के बाद भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए .
मांदर और ढोल-नगाड़ों पर झूमे लोग
शोभायात्रा के दौरान मांदर और ढोल-नगाड़ों की गूंज पर लोग झूमते नजर आए . इस दौरान पूर्व मंत्री सत्यानंद भोक्ता, डीडीसी अमरेंद्र सिंहा, जिला परिषद उपाध्यक्ष ब्रजकिशोर तिवारी, बीडीओ हरिनाथ महतो और थाना प्रभारी अवधेश सिंह समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए और पारंपरिक नृत्य का आनंद लिया.
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आकर्षक झांकियों ने मोहा मन
प्राकृतिक रूप से सजी आकर्षक झांकियों ने लोगों का मन मोह लिया . इन झांकियों के माध्यम से शांति, सौहार्द और प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया गया . शोभायात्रा शहर के विभिन्न मार्गों—पोस्ट ऑफिस, पुराना पेट्रोल पंप, मारवाड़ी मोहल्ला, जतराहीबाग और सदर थाना होते हुए पुनः सरना स्थल पहुंची .
प्रकृति और नवजीवन का प्रतीक है सरहुल
सरना समिति के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरहुल पर्व नए साल और प्रकृति के नवजीवन का प्रतीक है, जब सखुआ, महुआ और आम के पेड़ों में नए फूल और पत्तियां आती हैं .
सांस्कृतिक कार्यक्रम और सम्मान के साथ समापन
कार्यक्रम के समापन पर सांस्कृतिक आयोजन और पुरस्कार वितरण किया गया . इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने जिलेवासियों को सरहुल पर्व की शुभकामनाएं देते हुए प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया . चतरा में सरहुल पर्व ने परंपरा, संस्कृति और प्रकृति के प्रति आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया .

