बेरमो: बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल स्थित बोकारो क्लब दुर्गा मंडप प्रांगण में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा आयोजित हिंदू सम्मेलन वैचारिक और आध्यात्मिक विमर्श का केंद्र रहा.

स्वामी दिव्य ज्ञान का संबोधन
मुख्य अतिथि स्वामी दिव्य ज्ञान ने भारतीय समाज, कानून, शिक्षा और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़े गंभीर विषयों पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण साझा किया.
कानूनों के क्रियान्वयन पर उठाए सवाल
अपने संबोधन में स्वामी दिव्य ज्ञान ने धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम 2017 और गौ-हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 का उल्लेख करते हुए कहा कि कड़े कानूनों के बावजूद धरातल पर इनके अपेक्षित परिणाम नहीं दिख रहे हैं. उन्होंने चिंता व्यक्त की कि झारखंड में आदिवासी और हिंदू समाज का एक बड़ा वर्ग निरंतर धर्मांतरण और सामाजिक दबावों का शिकार हो रहा है.
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एनजीओ और पारदर्शिता पर जोर
उन्होंने वर्ष 2018 में 88 एनजीओ पर हुई एफसीआरए कार्रवाई का जिक्र करते हुए इस मामले में और अधिक पारदर्शिता और ठोस कदम उठाने की आवश्यकता पर बल दिया.
शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता
स्वामी ने 1984 के बाद देश की शिक्षा व्यवस्था में आए बदलावों पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली के कारण हमारी पारंपरिक दिनचर्या और आध्यात्मिक साधना का लोप हुआ है. उन्होंने आशंका व्यक्त की कि इन बदलावों के पीछे विदेशी एजेंसियों और मिशनरियों का प्रभाव हो सकता है, जिससे भारतीय सांस्कृतिक आधार कमजोर हुआ है.
वैदिक ज्ञान और शोध कार्यों की सराहना
वैदिक गणित की महत्ता पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ऋग्वेद की ऋचाएं वैज्ञानिक और गणितीय संरचनाओं से ओतप्रोत हैं. उन्होंने झारखंड के शोधकर्ताओं डॉ. विमल कुमार मिश्रा, प्रो. मृत्युंजय कुमार सिंह और सर्वित चटर्जी के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उनका शोध राष्ट्रीय परियोजनाओं और नीतिगत विकास में मील का पत्थर साबित हो सकता है.
आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक दृष्टिकोण
झारखंड की आध्यात्मिक विरासत की चर्चा करते हुए उन्होंने लंगटा बाबा जैसे संतों का उदाहरण दिया, जिनकी श्रद्धा सभी समुदायों में समान रूप से है. उन्होंने वर्ण व्यवस्था को भारत की मूल पहचान बताते हुए कहा कि वर्तमान जातिगत भेदभाव बाद के कालखंड की विकृति है.
कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में जिला संघ चालक, जिला सह संघ चालक, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भरत यादव, श्रवण सिंह, विश्वनाथ यादव, प्रफुल्ल ठाकुर, भैरव महतो, प्राण गोपाल सेन, बिनीता प्रसाद सहित विभिन्न धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि मुख्य रूप से उपस्थित रहे. पूरा वातावरण सांस्कृतिक चेतना और अनुशासन से ओतप्रोत दिखा

