द्वितीय विश्व युद्ध का गवाह: जमशेदपुर के चाकुलिया एयरबेस, जहां से लिखी गई थी जापान की तबाही की पटकथा, बहरागोड़ा से बरामद हुए बम करते है बात की पुष्टि

जमशेदपुर: जिले में स्थित चाकुलिया का ऐतिहासिक एयरपोर्ट आज भी द्वितीय विश्व युद्ध की सबसे बड़ी निशानियों में से एक है. यह...

जमशेदपुर: जिले में स्थित चाकुलिया का ऐतिहासिक एयरपोर्ट आज भी द्वितीय विश्व युद्ध की सबसे बड़ी निशानियों में से एक है. यह वह स्थान है जिसने न केवल युद्ध की भयावहता देखी, बल्कि उन विमानों को पनाह दी जिन्होंने दुनिया का नक्शा और युद्ध का रुख हमेशा के लिए बदल दिया.

परमाणु हमले और बी-29 विमानों का चाकुलिया कनेक्शन:

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि 6 अगस्त और 9 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर ‘लिटिल बॉय’ और फैट मैन नामक परमाणु बम गिराने वाले घातक बी-29 (B-29 Superfortress) बमवर्षक विमानों का इस एयरबेस से गहरा नाता रहा है. हालांकि अंतिम हमला प्रशांत महासागर के टिनियन द्वीप’ (मेरियाना द्वीप समूह) से किया गया था, लेकिन इन विमानों की शुरुआती तैनाती और प्रशिक्षण का मुख्य केंद्र चाकुलिया और धालभूमगढ़ ही थे. अमेरिकी वायु सेना की 58वीं एयर डिवीजन के अधिकारियों और उनके बी-29 विमानों की यहां मौजूदगी के दुर्लभ प्रमाण आज भी मिलते हैं.

क्यों चुना गया था चाकुलिया?

1942 में निर्मित इस रनवे को अंग्रेजों ने बेहद गुप्त रखा था. बीहड़ जंगलों के बीच स्थित होने के कारण यह दुश्मनों की नजरों से सुरक्षित था.उस समय जापानियों ने दक्षिण चीन सागर पर कब्जा कर रखा था. ऐसे में अमेरिकी विमानों को हिमालय के ऊपर से (जिसे ‘द हम्प’ कहा जाता था) उड़ान भरकर चीन तक रसद पहुंचानी पड़ती थी. चाकुलिया इसी दुर्गम हवाई मार्ग का मुख्य मुख्यालय था. कंसास (अमेरिका) से सात समंदर पार कर लाई गई युद्ध सामग्री और विमानों के लिए यह रनवे 1944 के दौर में सबसे व्यस्त हवाई अड्डों में से एक बन गया था.

बहरागोड़ा के पानीपड़ा में मिले शक्तिशाली बम करते है बात की पुष्टि:

हाल ही में बहरागोड़ा के पानीपड़ा गांव में मिले शक्तिशाली बम इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह पूरा इलाका युद्ध के दौरान बारूद के ढेर पर बैठा था. धालभूमगढ़ और चाकुलिया एयरपोर्ट के बीच की 20-25 किलोमीटर की दूरी सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण थी, जहां से मित्र राष्ट्रों की सेनाएं ‘चीन-बर्मा-भारत थिएटर के तहत अपनी सैन्य गतिविधियों का संचालन करती थीं. जापानियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए, बी-29 विमानों को चाकुलिया से उड़ान भरकर पहले चीन के एयरबेसों पर उतरना पड़ता था. वहां रसद और ईंधन पहुंचाने के बाद, उन्हीं चीनी ठिकानों से जापान पर हमले किए जाते थे. बाद में, जब अमेरिका ने मेरियाना द्वीपों पर नियंत्रण कर लिया, तो इन विमानों को वहां स्थानांतरित कर दिया गया, जहां से अंतिम परमाणु हमला किया गया.

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