न्यूज़ डेस्क : दिग्गज टेक कंपनी Microsoft ने विकसित देशों और वैश्विक दक्षिण के बीच बढ़ती एआई खाई को पाटने के लिए दशक के अंत तक 50 अरब डॉलर निवेश करने की घोषणा की है. यह ऐलान कंपनी के वाइस चेयर एवं अध्यक्ष Brad Smith और एआई नीति प्रभारी उपाध्यक्ष Natasha Crampton ने ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन’ के मंच से किया. कंपनी का मानना है कि अगर एआई की पहुंच समान रूप से नहीं बढ़ी, तो आर्थिक अवसरों की असमानता और गहराएगी.

Also Read : बजट सत्र 2026 में सीएम के विभागों की जिम्मेदारी चार मंत्रियों को सौंपी गई.
एआई डिफ्यूजन रिपोर्ट: क्यों जरूरी है यह निवेश
कंपनी की ‘एआई डिफ्यूजन रिपोर्ट’ में चेतावनी दी गई है कि एआई संसाधनों और क्षमताओं की असमान उपलब्धता वैश्विक उत्तर और वैश्विक दक्षिण के बीच आर्थिक दूरी बढ़ा सकती है. इसीलिए निवेश को पांच प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित किया जाएगा, जिनमें डिजिटल बुनियादी ढांचा, कौशल विकास, बहुभाषी एआई, स्थानीय नवाचार को बढ़ावा और एआई अपनाने के प्रभाव का आकलन शामिल है.
Also Read : नगरपालिका चुनाव 2026: मतगणना को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट
इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर इंटरनेट पहुंच तक
पिछले वित्त वर्ष में माइक्रोसॉफ्ट ने वैश्विक दक्षिण की जरूरतों को पूरा करने वाले डेटा सेंटर नेटवर्क पर आठ अरब डॉलर से अधिक खर्च किए. भारत, मेक्सिको, अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका, दक्षिण-पूर्व एशिया और पश्चिम एशिया जैसे क्षेत्रों में डिजिटल ढांचा मजबूत किया गया है. कंपनी का लक्ष्य 25 करोड़ वंचित लोगों तक इंटरनेट पहुंच सुनिश्चित करना है, जिनमें 10 करोड़ अफ्रीका में हैं. साझेदारियों के जरिए पहले ही अफ्रीका में 11.7 करोड़ लोगों तक कनेक्टिविटी पहुंचाई जा चुकी है.
Also Read : धनबाद में दामोदर नदी किनारे मोहाना बना हो रहा अवैध खनन: सरयू राय
2030 तक 2 करोड़ भारतीयों को एआई कौशल
कौशल निर्माण इस निवेश का अहम हिस्सा है. बीते वित्त वर्ष में क्लाउड, एआई और डिजिटल ट्रेनिंग कार्यक्रमों पर दो अरब डॉलर से अधिक खर्च किए गए. ‘माइक्रोसॉफ्ट एलिवेट’ पहल के तहत 2028 तक दो करोड़ लोगों को एआई सर्टिफिकेशन दिलाने का लक्ष्य है. भारत में 2025 में 56 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने के बाद 2030 तक दो करोड़ भारतीयों को एआई कौशल से लैस करने की योजना बनाई गई है. ‘एलिवेट फॉर एजुकेटर्स’ कार्यक्रम के तहत दो लाख से अधिक संस्थानों के 20 लाख शिक्षकों और 80 लाख छात्रों तक पहुंचने की रणनीति है.
बहुभाषी एआई और मजबूत डेवलपर इकोसिस्टम
कंपनी का कहना है कि भाषा और सांस्कृतिक विविधता एआई के विस्तार में बड़ी बाधा बनती है, इसलिए बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक एआई सिस्टम पर विशेष जोर दिया जा रहा है. भारतीय संस्थानों के साथ मिलकर सामुदायिक स्तर पर एआई मूल्यांकन टूल विकसित किए जा रहे हैं. डेवलपर समुदाय के संदर्भ में, GitHub पर भारत का 2.4 करोड़ डेवलपर्स का समुदाय दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है और शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वालों में शामिल है. 2020 से इसकी वार्षिक वृद्धि दर 26 प्रतिशत से अधिक रही है. कुल मिलाकर, माइक्रोसॉफ्ट का यह 50 अरब डॉलर का निवेश एआई को अधिक समावेशी, सुलभ और संतुलित बनाने की दिशा में एक निर्णायक पहल माना जा रहा है. यह कदम न केवल तकनीकी विकास को रफ्तार देगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल समानता की नई नींव भी रख सकता है.

