11 साल बाद मिली पहचान: केरल का ब्लास्टर्स जूनियर फुटबॉलर निकला चाईबासा का लाल

चाईबासा: कभी केरल की गलियों और फुटबॉल के मैदानों में अपनी पहचान बनाने वाला राजा. आज पूरे झारखंड और केरल में चर्चा...

चाईबासा: कभी केरल की गलियों और फुटबॉल के मैदानों में अपनी पहचान बनाने वाला राजा. आज पूरे झारखंड और केरल में चर्चा का विषय बना हुआ है. केरल ब्लास्टर्स की जूनियर टीम के लिए खेलते हुए केरल के घर-घर में मशहूर हुए राजा अब अपने असली घर यानी झारखंड के चाईबासा लौटने की तैयारी में हैं. यह कहानी एक बच्चे के संघर्ष, उसकी सफलता और अंत में एक चमत्कारिक मिलन की है. इसमें चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के सचिव बैद्यनाथ कुमार की भी भूमिका अहम रही है.

केयर होम्स से शुरू हुआ संघर्ष का सफर

राजा का सफर चुनौतियों से भरा रहा. साल 2013 में राजा को एर्नाकुलम चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के माध्यम से पल्लुरूथी स्नेहा भवन लाया गया था. यहां से उनके जीवन की नई दिशा तय हुई. इसके बाद 26 नवंबर 2016 को उसे त्रिशूर चिल्ड्रन्स होम भेज दिया गया, जहां उसने अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की. अपनों से दूर रहते हुए भी राजा ने कभी हार नहीं मानी.

फुटबॉल ने दिलाई नई पहचान

राजा के पास गजब का टैलेंट था और उसने फुटबॉल को अपनी ताकत बनाया. अपनी मेहनत के दम पर उसने इंडियन सुपर लीग के मशहूर क्लब केरल ब्लास्टर्स की जूनियर टीम में जगह बनाई. देखते ही देखते वे केरल में एक जाना-माना फुटबॉल खिलाड़ी बन गया, लेकिन इतनी शोहरत के बावजूद उनके दिल के एक कोने में अपने परिवार से मिलने की तड़प हमेशा बरकरार रही.

एक व्हाट्सएप मैसेज और शुरू हुई तलाश

इस साल तीन फरवरी को राजा को कन्नूर जिले के थालास्सेरी स्थित आफ्टर-केयर होम में शिफ्ट किया गया. यहीं से उनकी घर वापसी की पटकथा लिखी गई. ओ.के. मोहम्मद अशरफ ने मिसिंग पर्सन्स केरला व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए राजा के परिवार की तलाश शुरू की. उन्होंने रांची (झारखंड) के चाइल्ड राइट्स फाउंडेशन के बैद्यनाथ कुमार और अफसर अहमद खान से संपर्क किया. इस मुहिम में के.के. साहू और फरदीन खान जैसे समाजसेवियों ने भी अपनी जान लगा दी.

सोशल मीडिया बना उम्मीद की किरण

अफसर अहमद खान और उनकी टीम ने राजा के बारे में जानकारी चाईबासा के स्थानीय अखबारों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रसारित की. राजा को अपने परिवार के बारे में बहुत कम जानकारी थी  सिर्फ जिला मुख्यालय और कुछ धुंधले नाम. लेकिन टीम के सामूहिक प्रयासों, जिनमें राजस्थान और उत्तर प्रदेश के वॉलंटियर्स भी शामिल थे, ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिया. महज कुछ ही दिनों में चाईबासा में राजा के रिश्तेदारों का पता लगा लिया गया.

चाईबासा में जश्न का माहौल

फिलहाल चाईबासा शहर अपने स्टार बेटे की वापसी का बेसब्री से इंतजार कर रहा है. अखबारों और सोशल मीडिया पर राजा की खबरें छाई हुई हैं. यह घटना इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि अगर सोशल मीडिया और कम्युनिटी नेटवर्क का सही इस्तेमाल किया जाए, तो वे बिछड़े हुए दिलों को मिलाने का सबसे सशक्त माध्यम बन सकते हैं.

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