रांची: 67 श्रमिकों को मिला पीएफ का 70 लाख की बकाया राशि, श्रमिकों के चेहरे खिले

Ranchi: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) के प्री-लिटिगेशन मंच के माध्यम से 67 श्रमिकों की वर्षों पुरानी पीएफ संबंधी समस्या का समाधान...

Ranchi: जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा) के प्री-लिटिगेशन मंच के माध्यम से 67 श्रमिकों की वर्षों पुरानी पीएफ संबंधी समस्या का समाधान किया गया. 70 लाख की बकाया राशि, जो एकाउंट फ्रिज होने के कारण नहीं मिला था, अब वो राशि उन श्रमिकों को मिल जाएगा. ये सभी श्रमिक विभिन्न छोटे कंपनियों में कार्यरत थे.

नवंबर 2025 को की गई थी शिकायत

यह प्री-लिटिगेशन शिकायत 13 नवंबर 2025 को डालसा से की गई थी. श्रमिकों की प्रारंभिक शिकायत अपने नियोक्ता के विरुद्ध थी. उनका आरोप था कि कंपनी द्वारा पीएफ की राशि जमा नहीं की जा रही है, जिसके कारण वे कई वर्षों से अपने ही मेहनत की कमाई प्राप्त करने के लिए भटक रहे हैं. बाद में उन श्रमिकों को यूट्यूब में डालसा के माध्यम से जानकारी मिली कि आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना के अंतर्गत भेजे गए कुछ पीएफ खातों के अप्रूवल में तकनीकी अनियमितताए पाई गई है. इसके कारण कई खातों को फ्रीज कर दिया गया था. इन श्रमिकों ने डालसा के कार्यक्रमों की जानकारी आकाशवाणी, सोशल मीडिया और यूट्यूब वीडियो के माध्यम से प्राप्त की और जागरूक होकर डालसा पहुंचे. डालसा प्री-लिटिगेशन में नियुक्त मीडिएटर अरुणा प्रकाश ने मामले में सक्रिय और संवेदनशील भूमिका निभाई. शिकायत प्राप्त होने के बाद से लगातार श्रमिकों, ईपीएफओ कार्यालय तथा संबंधित पक्षों के साथ समन्वय स्थापित किया. लगभग प्रतिदिन अथवा प्रत्येक तीन-चार दिनों के अंतराल पर सभी पक्षों से लगातार संवाद किया गया. श्रमिकों को आवश्यक जानकारी दी गई तथा अधिकारियों के साथ निरंतर फॉलो-अप कर मामले को आगे बढ़ाया गया.

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ईपीएफओ कार्यालय का भी काफी सहयोग मिला

मामले की जटिल परिस्थितियों और अनेक व्यावहारिक कठिनाइयों के बावजूद मीडिएटर द्वारा निरंतर प्रयास, समन्वय, धैर्य और विश्वास की प्रक्रिया जारी रखी गई. ईपीएफओ कार्यालय का भी काफी सकारात्मक एवं सहयोगात्मक रवैया रहा. शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसके बाद 67 श्रमिकों के पीएफ खातों को डी-फ्रीज कर दिया गया. परिणामस्वरूप सभी लाभुकों को उनका बकाया धन प्राप्त हो सका.

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कोई बेटी की शादी कर रहा तो कोई बना रहा मकान

प्राप्त राशि से कोई श्रमिक अपने घर का निर्माण कर रहा है. कोई अपनी बेटी की शादी की तैयारी कर रहा है, तो कोई अपने बच्चों की शिक्षा पर खर्च कर रहा है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि श्रमिकों को बिना किसी मुकदमेबाजी, बिना अतिरिक्त खर्च और बिना लंबी न्यायिक प्रक्रिया के उनका वैधानिक अधिकार मिल हो गया. यह मामला इस बात का उत्कृष्ट उदाहरण है कि प्री-लिटिगेशन और मध्यस्थता व्यवस्था न केवल आम लोगों को त्वरित एवं सुलभ न्याय प्रदान कर रही है, बल्कि न्यायालयों पर अनावश्यक मुकदमों का बोझ कम करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है. राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की पहल “न्याय द्वार तक” की भावना इस मामले में वास्तविक रूप से साकार होती दिखाई दी, जहां न्याय व्यवस्था की पहुंच समाज के अंतिम व्यक्ति तक सुनिश्चित हुई. साथ ही, सोशल मीडिया और जन-जागरूकता अभियानों के माध्यम से विधिक सेवाओं की जानकारी अब जमीनी स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुच रही है. इस सफल पहल ने न केवल श्रमिकों में विश्वास बढ़ाया है, बल्कि समाज में यह सकारात्मक संदेश भी दिया है कि संवाद, मध्यस्थता और संस्थागत सहयोग के माध्यम से जटिल समस्याओं का समाधान बिना मुकदमेबाजी के भी संभव है.

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