सरायकेला में चड़क पूजा की धूम, छऊ नृत्य और भक्ता फुड़ा को लेकर उत्साह

SARAIKELA: नीमडीह प्रखंड के लुपुंगडीह पंचायत स्थित बाना गाँव में चैत्र संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक चड़क पूजा श्रद्धा और उल्लास के...

SARAIKELA: नीमडीह प्रखंड के लुपुंगडीह पंचायत स्थित बाना गाँव में चैत्र संक्रांति के अवसर पर पारंपरिक चड़क पूजा श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुई. जमींदार परिवार के स्व. महेंद्र सिंह द्वारा स्थापित प्राचीन शिव मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी पूजा का आयोजन किया गया.

घर-घर जाकर हुआ भोक्ता पाठ

सोमवार को बाना और पितकी गाँव के प्रत्येक घर में महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की. शिव मंदिर के पुजारी पंडित संतोष पांडेय एवं पाठ भोक्ता मंडली ने घर-घर जाकर विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ चड़क पूजा का भोक्ता पाठ कराया. यह परंपरा जमींदार महेंद्र सिंह के समय से चली आ रही है.

भक्तिमय माहौल में गूँजा ‘ॐ नमः शिवाय’

हर वर्ष चैत्र संक्रांति के अवसर पर सार्वजनिक शिव मंदिर, बाना में चड़क पूजा का आयोजन किया जाता है, जिसमें बाना व पितकी गाँव के श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ की आराधना करते हैं. पूरे गाँव में ‘ॐ नमः शिवाय’ के जयकारों से भक्तिमय माहौल बना रहा.

छऊ नृत्य और भक्ता फुड़ा को लेकर उत्साह

सनातन परंपरा के इस पावन चैत्र पर्व के दौरान रात्रि जागरण में छऊ नृत्य और अगले दिन सुबह मंदिर प्रांगण में होने वाले ‘भक्ता फुड़ा’ अनुष्ठान को लेकर विशेष उत्साह देखा जा रहा है.

आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

मान्यता के अनुसार, चैत्र पर्व की रात जागरण कर छऊ नृत्य का आयोजन होता है, जिसमें कलाकार पौराणिक कथाओं को जीवंत करते हैं. अगले दिन ‘भक्ता फुड़ा’ अनुष्ठान में भक्त मन्नत पूरी होने पर पीठ में अंकुश चुभाकर लगभग 100 फीट ऊँचे चड़क खंभे पर बाँधकर घुमाए जाते हैं.

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का माध्यम

ये सभी दिव्य अनुष्ठान मिलकर क्षेत्र की अद्वितीय सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा हमारी समृद्ध संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सबसे सशक्त माध्यम है.

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