Lifestyle Desk: आज की डिजिटल लाइफस्टाइल में बच्चों का बचपन धीरे-धीरे स्क्रीन तक सीमित होता जा रहा है. खेल के मैदान की जगह अब मोबाइल और गेमिंग ने ले ली है, जिसका असर उनकी सेहत पर साफ नजर आने लगा है.
रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े
हाल ही में सामने आए रिपोर्ट्स चिंता बढ़ाने वाले हैं-करीब 49% बच्चे रोज 3 घंटे से ज्यादा गेमिंग में बिताते हैं, 66% स्कूली बच्चों की फिटनेस कमजोर पाई गई, और सिर्फ 34% ही फिटनेस टेस्ट में सफल हो सके.
दिल और फेफड़ों की क्षमता हो रही कमजोर
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि बच्चों का दिल और फेफड़े पहले जितने मजबूत नहीं रह गए हैं. ज्यादा मोबाइल और गेम खेलने की वजह से बच्चे कम दौड़-भाग रहे हैं, जिससे उनकी बॉडी कमजोर होती जा रही है.
स्क्रीन टाइम बढ़ने से घट रही सहनशक्ति
सरल भाषा में कहें तो, स्क्रीन टाइम बढ़ने से खेल-कूद कम हो गया है और इसका असर उनकी ताकत और सहनशक्ति पर पड़ रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की कार्डियो फिटनेस तेजी से गिर रही है, यानी अब वे पहले जितनी देर तक दौड़ या खेल नहीं पा रहे हैं.
एरोबिक फिटनेस में गिरावट और मोटापा बना कारण
एरोबिक फिटनेस मतलब शरीर की वो क्षमता, जिससे दिल, फेफड़े और मांसपेशियां लंबे समय तक ठीक से काम कर पाती हैं-अब वही धीरे-धीरे कमजोर हो रही है.
चौंकाने वाली बात ये है कि बच्चों के पैरों की ताकत कम हो रही है, उनका बैलेंस और मूवमेंट भी पहले जैसा नहीं रहा. इसके पीछे एक बड़ा कारण बढ़ता मोटापा भी माना जा रहा है, जो उनकी फिटनेस पर सीधा असर डाल रहा है.
सरकारी vs प्राइवेट स्कूल: फिटनेस में दिखा बड़ा अंतर
रिपोर्ट में सामने आया कि सरकारी स्कूलों के बच्चे फिटनेस के मामले में आगे हैं. उन्हें खेलने के लिए ज्यादा समय और खुला मैदान मिलता है, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधि बेहतर रहती है. वहीं प्राइवेट स्कूलों के बच्चे पीछे नजर आए, जहां पढ़ाई का ज्यादा दबाव और बढ़ता स्क्रीन टाइम उनकी एक्टिविटी को कम कर रहा है. लड़कों में स्टैमिना बेहतर पाया गया, जबकि लड़कियों में फ्लेक्सिबिलिटी और बैलेंस ज्यादा अच्छा देखने को मिला.
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गेमिंग और लाइफस्टाइल से बिगड़ रही सेहत
- खेलने के लिए पर्याप्त जगह की कमी.
- मोबाइल और लैपटॉप पर जरूरत से ज्यादा समय.
- परिवार और स्कूल में खेल-कूद को कम महत्व.
एक्सपर्ट्स की राय
- रोज कम से कम 1 घंटा बाहर खेलना जरूरी.
- स्क्रीन टाइम को सीमित रखें.
- बच्चों को संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार दें.
- जंक फूड का सेवन कम से कम करें.
- बच्चों को रोजाना एक्टिव रहने के लिए प्रोत्साहित करें.
