Palamu: क्षेत्र में गर्मी का सितम लगातार जारी है. आज पारा 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुँच गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है. सुबह दस बजते ही धूप इतनी तीखी हो जा रही है कि सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगा है. इस भीषण गर्मी और बढ़ते पारे के बीच लोग अब प्यास बुझाने के लिए बिजली के उपकरणों (फ्रिज) के बजाय अपनी पुरानी संस्कृति और मिट्टी के घड़ों पर भरोसा जता रहे हैं.
सेहत के लिए वरदान है मिट्टी का घड़ा
पुराने समय से ही हमारे पूर्वज मिट्टी के घड़े का पानी इस्तेमाल करते आए हैं. जानकारों और बुजुर्गों का कहना है कि घड़े में रखा पानी किसी ‘मिनरल वाटर’ से कम नहीं होता. मिट्टी के प्राकृतिक गुणों के कारण इसमें पानी न केवल शीतल रहता है, बल्कि यह शरीर के पीएच लेवल को भी बनाए रखता है. फ्रिज का अत्यधिक ठंडा पानी जहां गले और सेहत को नुकसान पहुंचा सकता, वहीं घड़े का पानी शरीर को भीतर से ताजगी देता है.
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आधुनिक हुए मिट्टी के घड़े
समय के साथ अब कुम्हारों ने भी मिट्टी के घड़ों में आधुनिक बदलाव किए हैं. अब बाजार में ‘नल वाले घड़े’ उपलब्ध हैं, जिससे पानी निकालना बेहद आसान हो गया है. इससे बार-बार हाथ डालने की जरूरत नहीं पड़ती और पानी की शुद्धता भी बनी रहती है.
संस्कृति और रोजगार से जुड़ा है घड़ा
मिट्टी का घड़ा हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और संस्कृति का प्रतीक है. आज भी चिलचिलाती गर्मी में लोग मिट्टी की खुशबू वाले इस शीतल जल को ही प्राथमिकता दे रहे हैं. बाजार में इनकी बढ़ती मांग ने स्थानीय कारीगरों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है.
