रांची: शहर के मेन रोड स्थित चर्चित रियल एस्टेट प्रोजेक्ट
आहा फोर स्क्वायर मॉल (इंडिया होटल के सामने) को लेकर रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (रेरा) ने शुक्रवार निर्णायक फैसला सुनाया है. रेरा ने जमीन द्वारा डेवलपर पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए प्रोजेक्ट को तय समय सीमा के अंदर पूरा करने को कहा है.
जाने क्या है पूरा मामला?:
यह विवाद एजाज हैदरी और अन्य बनाम मैसर्स आहा प्लानर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड के रूप में रेरा के समक्ष था. जमीन मालिक ने डेवलपर और उनके प्रबंध निदेशक शोएब हसन चांद पर परियोजना में देरी करने का आरोप लगाया था और इसके बदले किराए व मुआवजे की मांग की थी.
रेरा की जांच में हुए कई अहम खुलासे:
मामले की जांच के दौरान रेरा ने मामले के रिकॉर्ड की जांच के बाद पाया कि प्रोजेक्ट में हुई देरी के लिए डेवलपर नहीं, बल्कि खुद जमीन मालिक जिम्मेदार थे. रेरा ने टिप्पणी की कि शिकायतकर्ताओं ने प्राधिकरण से कई महत्वपूर्ण तथ्य छुपाए है.
नगर निगम में भवन मानचित्र स्वीकृति को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई:
जांच में पाया गया कि जमीन मालिक ने समय पर जमीन नहीं खाली किया और न ही जमीन पर कब्जा करके डेवलपर को दिया. जमीन मालिक ने 2016 में धारा 144 सीआरपीसी के तहत कार्यवाही शुरू की थी, जिसे बाद में एसडीएम रांची की अदालत ने निरस्त कर दिया था. इसके अलावा, रांची नगर निगम में भवन मानचित्र स्वीकृति को लेकर भी आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं, जिससे काम में देरी हुई. जमीन मालिक ने रेरा रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक अनिवार्य दस्तावेज भी डेवलपर को उपलब्ध नहीं कराए थे.
रेरा ने जमीन मालिक के मुआवजे की मांग को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया:
रेरा ने जमीन मालिक की मुआवजे की मांग को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया है. इसके साथ ही कई निर्देश जारी किए हैं. जमीन मालिक को आदेश दिया गया है कि वे डेवलपर के साथ सहयोग करें और रेरा रजिस्ट्रेशन के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज तुरंत उपलब्ध कराएं. आवश्यक दस्तावेज प्राप्त होने की तिथि से तीन महीने के भीतर रेरा रजिस्ट्रेशन का कार्य पूरा करना होगा. पूरी परियोजना को पूर्ण करने के लिए ढाई साल की समय-सीमा निर्धारित की गई है.
