Ranchi: झारखंड के सरकारी प्लस-टू विद्यालयों में अब केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि रोजगार की गारंटी वाली शिक्षा पर जोर होगा. राज्य सरकार के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3 करोड़ 40 लाख 53 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है. इस निवेश का सीधा उद्देश्य इंटरमीडिएट स्तर पर चल रहे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को हाई-टेक और अधिक प्रभावी बनाना है.
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कड़ी निगरानी और वित्तीय अनुशासन
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बजट का एक-एक पैसा पारदर्शिता के साथ खर्च होना चाहिए. आवंटित राशि से शिक्षकों और कर्मियों के वेतन भुगतान के साथ-साथ लैब और अन्य जरूरी संसाधनों को प्राथमिकता दी जाएगी. विभाग ने चेतावनी दी है कि वित्तीय नियमों में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी; यदि कोई गड़बड़ी मिली तो संबंधित जिला शिक्षा पदाधिकारी सीधे जिम्मेदार होंगे.
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पारदर्शिता के लिए डिजिटल कवच
भ्रष्टाचार रोकने और प्रक्रिया को सुस्त रफ्तार से बचाने के लिए एचआरएमएस पोर्टल को अनिवार्य कर दिया गया है. सभी कर्मियों का डेटा और जीपीएफ नंबर अपडेट रखना होगा. साथ ही, हर महीने की 10 तारीख तक खर्च का पूरा हिसाब महालेखाकार और वित्त विभाग को सौंपना होगा.
