Ranchi: रांची की पुरानी विधानसभा के सभागृह में युगांतर भारती और नेचर फाउंडेशन की ओर से आयोजित पृथ्वी दिवस समारोह में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने आधुनिक कार्य संस्कृति पर निशाना साधा. उन्होंने स्पष्ट कहा कि आज आम आदमी से कहीं अधिक सत्ता के शीर्ष पर बैठे नौकरशाहों और मेधावी मष्तिष्कों को जागरूक होने की जरूरत है. सरयू राय के अनुसार, हम औद्योगिक क्रांति के चौथे चरण यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उस युग में हैं, जहां विकास की वर्तमान दिशा विनाश की ओर ले जा रही है.
शुभ-लाभ की जगह लोभ-लाभ ने ली
सरयू राय ने कहा कि तकनीकी एक बेहतरीन सेवक तो हो सकती है, लेकिन एक खराब मालिक है. आज समाज में ‘शुभ-लाभ’ की परंपरा खत्म हो गई है और ‘लोभ-लाभ’ हावी है. उन्होंने चेतावनी दी कि पृथ्वी के गर्भ में किए जा रहे अनियंत्रित परीक्षण और माइनिंग हमें दोबारा ‘हिमयुग’ की ओर धकेल रहे हैं. उन्होंने ‘सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ के बजाय ‘शाश्वत विकास’ की अवधारणा को अपनाने पर जोर दिया.
2047 तक सोलर वेस्ट बनेगा 11 मिलियन टन की चुनौती
युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने भविष्य के संकटों पर आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 2047 तक भारत में सोलर वेस्ट का अंबार 11 मिलियन टन तक पहुंच जाएगा, जिसका प्रबंधन वैश्विक चुनौती होगा. उन्होंने बताया कि इस वर्ष वैश्विक तापमान में 0.3 डिग्री की बढ़ोतरी का अनुमान खतरे की बड़ी घंटी है.
वैदिक ज्ञान बनाम आधुनिक अंग्रेजीयत
समारोह में डॉ. एमके जमुआर ने भारतीय संस्कृति की उपेक्षा पर दुख जताते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण के जो सूत्र आज खोजे जा रहे हैं, वे 5000 साल पहले ‘अथर्ववेद’ में जल, वायु और वनस्पति की शुद्धता के रूप में लिखे जा चुके हैं. वहीं वरिष्ठ पर्यावरणविद् ओम सिंह ने कहा कि सरकार और जनता के बीच समन्वय की कमी के कारण 190 देशों के प्रयासों के बावजूद पृथ्वी संरक्षण में अपेक्षित सफलता नहीं मिल पा रही है.
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